
सीबीएसई राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-17 बालक वर्ग का खिताब जीतकर वाराणसी और उत्तर प्रदेश को किया गौरवान्वित
वाराणसी। ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की नगरी काशी ने अब शतरंज की राष्ट्रीय बिसात पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया है। सनबीम लहरतारा के अंडर-17 बालक वर्ग ने सीबीएसई राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप 2026 में चैंपियन बनकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पंजाब के जालंधर स्थित ला ब्लॉसम्स स्कूल में 14 से 18 अक्टूबर तक आयोजित इस प्रतियोगिता में मिली यह शानदार जीत इसलिए भी विशेष है, क्योंकि इसने वर्षों से राष्ट्रीय शतरंज में अपना दबदबा बनाए रखने वाले चेन्नई के विद्यालयों, विशेषकर वेलाम्मल स्कूलों, की वर्चस्वशाली परंपरा को चुनौती देते हुए नया इतिहास रचा है।
चेन्नई लंबे समय से भारत को अनेक ग्रैंडमास्टर और विश्वस्तरीय शतरंज प्रतिभाएँ देने के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे प्रतिस्पर्धात्मक परिदृश्य में सनबीम लहरतारा के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय चैंपियन बनना केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि वाराणसी की उभरती खेल प्रतिभा, अनुशासन, रणनीतिक कौशल और दृढ़ संकल्प का सशक्त प्रमाण है।
अंडर-17 राष्ट्रीय चैंपियन टीम के सदस्य हैं:
प्रखर त्रिपाठी (कक्षा X-C), अर्णव अग्रवाल (कक्षा X-C), माज़ इक़बाल (कक्षा X-C), अजय पार्वथा रेड्डी (कक्षा X-D) और श्रेयांश सिंह (कक्षा XI-F)। श्रेयांश सिंह ने बोर्ड विनर का सम्मान प्राप्त कर इस उपलब्धि को और गौरवपूर्ण बनाया।
इसी प्रतियोगिता में सनबीम लहरतारा की अंडर-11 बालक टीम ने भी सराहनीय प्रदर्शन करते हुए द्वितीय उपविजेता (सेकंड रनर्स-अप) का स्थान प्राप्त किया। इस टीम में हर्ष खेतान (कक्षा VII-A), रुद्र प्रताप श्रीवास्तव (कक्षा VII-B), अद्विक केशरी (कक्षा VII-C), पार्थ टिकमानी (कक्षा VI-A) और धैर्य सिंघल (कक्षा VI-A) शामिल रहे।
प्रतियोगिता में विद्यालय की टीम के प्रबंधक संजय सिंह ने खिलाड़ियों के साथ समन्वय और प्रतियोगिता संबंधी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह विजय सनबीम लहरतारा की खेल संस्कृति, विद्यार्थियों की निरंतर साधना, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यालय के खेल-केंद्रित दृष्टिकोण का परिणाम है। राष्ट्रीय स्तर पर चेन्नई के स्थापित शतरंज केंद्रों के बीच अपनी पहचान बनाना वाराणसी के लिए विशेष गर्व का विषय है। यह उपलब्धि पूर्वांचल के युवा खिलाड़ियों को भी संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से राष्ट्रीय मंच पर सर्वोच्च स्थान हासिल किया जा सकता है।
सनबीम लहरतारा की यह ऐतिहासिक जीत काशी के गौरव में एक नया अध्याय जोड़ती है—अब शतरंज की बिसात पर भी वाराणसी अपनी निर्णायक चाल चल रहा है।