23 अक्टूबर को शिक्षक सही नेतृत्व चुनें, महिला शिक्षिकाओं से मतदान की अपील; समान काम का समान वेतन और पुरानी पेंशन प्रमुख मुद्दे

वाराणसी। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा की अधिकृत प्रत्याशी ऋतिका दूबे ने कहा कि उनका चुनाव लड़ने का उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं को सदन तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना है। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए उन्होंने शिक्षकों से सही नेतृत्व चुनने और अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि शिक्षक हित और शिक्षक संगठनों के अस्तित्व को बचाने का चुनाव है।
मंगलवार को पत्रकार वार्ता में ऋतिका दूबे ने कहा कि पिछले कुछ चुनावों से राजनीतिक दल भी शिक्षक निर्वाचन में उतरने लगे हैं। उनके पास संसाधन और धनबल है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत शिक्षक हैं। शिक्षक बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं और अपने हितों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्हें तय करना है कि शिक्षकों की समस्याओं को सदन में कौन मजबूती से उठाएगा।
महिला शिक्षिकाओं से मतदान की अपील
ऋतिका दूबे ने कहा कि प्रदेश के शिक्षा विभाग में महिला शिक्षिकाओं की भागीदारी करीब 45 प्रतिशत है। वह इस चुनाव में महिला प्रत्याशी के रूप में शिक्षिकाओं से समर्थन मांग रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं आठ जिलों में जाकर शिक्षकों से संपर्क कर रही हूं। एक महिला के लिए यह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन शिक्षिकाओं और शिक्षकों के सहयोग से आगे बढ़ने का भरोसा है।” उन्होंने महिला शिक्षिकाओं से 23 अक्टूबर को मतदान कर अपने अधिकार और भविष्य के लिए आगे आने की अपील की।
समान काम का समान वेतन और ओपीएस प्रमुख मुद्दे
प्रत्याशी ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को आज भी सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा नहीं मिल रही है। कहीं शिक्षकों को एक लाख रुपये तक वेतन मिलता है, जबकि समान काम करने वाले वित्तविहीन शिक्षकों को पांच हजार, छह हजार, दस हजार या 15 हजार रुपये में गुजारा करना पड़ता है। उनकी पहली प्राथमिकता समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित कराना है। इसके साथ ही वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सेवा सुरक्षा नियमावली बनाने और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की मांग को सदन में उठाने का प्रयास करेंगी।
उन्होंने कहा कि मदरसों में नियुक्तियों पर लगी रोक को हटाने, संस्कृत विद्यालयों, मदरसों और सीबीएसई-आईसीएसई बोर्ड से जुड़े शिक्षकों को भी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ दिलाने की जरूरत है। शिक्षकों के बीच योजनाओं और सुविधाओं को लेकर भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी शिक्षकों को समान अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वेतन संबंधी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और 1986 से वेतन का मुद्दा भी उठाया जाता रहा है।
शिक्षक संगठनों की एकजुटता पर जोर
ऋतिका दूबे ने कहा कि शिक्षक संगठन पिछले करीब दो दशकों से अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हैं। इसका असर शिक्षकों की मांगों और अधिकारों की लड़ाई पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक एकजुट नहीं हुए तो राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से शिक्षक संगठनों का अस्तित्व कमजोर हो सकता है। उनका कहना था कि शिक्षक संगठनों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है, ताकि वे सरकार के सामने शिक्षकों की मांगों को प्रभावी ढंग से रख सकें।
अफवाहों से मनोबल नहीं होगा कमजोर
नामांकन नहीं करने, पर्चा वापस लेने और किसी प्रत्याशी को समर्थन देने की चर्चाओं पर ऋतिका दूबे ने कहा कि इस तरह की बातें उनका मनोबल गिराने के लिए फैलाई गईं। उन्होंने कहा कि वह सभी चुनौतियों का सामना करते हुए चुनाव मैदान में डटी हैं और शिक्षकों के मुद्दों को लेकर पीछे हटने वाली नहीं हैं।
उन्होंने अन्य प्रत्याशियों के राजनीतिक दलों से जुड़ने पर भी सवाल उठाए और कहा कि शिक्षक संगठनों के माध्यम से शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ना अधिक जरूरी है। अंत में उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि 23 अक्टूबर को छुट्टी मनाने के बजाय मतदान केंद्र पहुंचें और ऐसे नेतृत्व का चुनाव करें, जो उनकी समस्याओं को सदन में मजबूती से उठा सके।
