
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ पूजन के पांचवें दिन जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। जन्माष्टमी के अवसर पर महायज्ञ परिसर में काली जी के नाम विशेष अनुष्ठान किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ वेदी में विधि-विधान से विशेष आहुतियां अर्पित की गईं। इस दौरान पूरा महायज्ञ परिसर देवी उपासना, मंत्रोच्चार और श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंजता रहा।
जन्माष्टमी हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार और असत्य का प्रभाव बढ़ा, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। श्रीकृष्ण का जीवन मानव समाज को धर्म, कर्म, प्रेम, करुणा, नीति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्मोत्सव को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाते हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने जन्माष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और मां काली अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही परम शक्ति के विविध स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परम तत्व की अनुभूति अनेक स्वरूपों में की गई है। श्रीकृष्ण धर्म की स्थापना, प्रेम, करुणा और लोकमंगल के प्रतीक हैं, जबकि मां काली अधर्म, अज्ञान, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों के विनाश की शक्ति का स्वरूप हैं। दोनों स्वरूपों का मूल उद्देश्य धर्म की रक्षा और मानवता का कल्याण है।
शंकराचार्य महाराज ने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के साथ मां काली का स्मरण करना सनातन धर्म की व्यापक आध्यात्मिक दृष्टि को दर्शाता है। कृष्ण का संदेश मनुष्य को अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा देता है, वहीं काली शक्ति व्यक्ति के भीतर के भय, अज्ञान और नकारात्मकता का नाश करने का संदेश देती हैं। इसलिए कृष्ण और काली का पूजन एक ही परम चेतना के दो आयामों का पूजन है।
महायज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा के साथ विशेष अनुष्ठान में सहभागिता की। यज्ञ वेदी में आहुतियां अर्पित कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि, विश्व कल्याण, सामाजिक शांति तथा सभी प्राणियों के मंगल की कामना की गई। जन्माष्टमी के कारण महायज्ञ परिसर में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, देवी स्तुति और श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
मौके पर मिथिलेश दीक्षित लखनऊ, बाबूलाल मुवडा जयगाव भूटान, सच्चिदानंद तिवारी,बृजभूषानंद सरस्वती, रामलखन दास नागा सहित सैकड़ों संत महात्मा उपस्थित रहे