
वाराणसी, 4 सितम्बर 2026। शिक्षा संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह का भव्य एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। समारोह में धार्मिक अनुष्ठान, भजन, श्लोक-पाठ, नृत्य, संगीत तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं एवं दर्शन पर आधारित विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक झांकियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम शिक्षा संकाय के सभागार में संपन्न हुआ।
समारोह का शुभारंभ सायं 4:45 बजे श्रीकृष्ण पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात् सायं 5:00 से 6:00 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें विद्यार्थियों ने भजन, श्लोक-पाठ, एकल एवं सामूहिक नृत्य तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, व्यक्तित्व एवं लीलाओं को जीवंत किया।
विभिन्न सदनों की विषय-आधारित झांकियाँ बनीं मुख्य आकर्षण
समारोह का प्रमुख आकर्षण शिक्षा संकाय के विभिन्न सदनों द्वारा तैयार की गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की विषय-आधारित झांकियाँ रहीं। विद्यार्थियों ने इन झांकियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन, बाल-लीलाओं, प्रेम, भक्ति, नीति, कर्तव्य एवं आध्यात्मिक दर्शन के विभिन्न आयामों को रचनात्मक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
विभिन्न सदनों द्वारा प्रस्तुत झांकियों के प्रमुख विषयों में ‘श्रीकृष्ण लीला’, ‘कान्हा और वंशी का प्रथम मिलन’, ‘द्वारिकाधीश’, ‘उद्धव का हृदय परिवर्तन’, ‘गीता उपदेश’ तथा ‘विश्वरूप दर्शन’ शामिल रहे। प्रत्येक झांकी के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व और उनके जीवन-दर्शन के एक विशिष्ट पक्ष को कलात्मक एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्ति प्रदान की गई।
पूतना वध की प्रस्तुति रही विशेष आकर्षण
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान पूतना वध की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीला से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रसंग को विद्यार्थियों ने नाटकीय एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। अभिनय, भावाभिव्यक्ति और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से प्रसंग को जीवंत रूप दिया गया, जिसे उपस्थित दर्शकों ने विशेष रुचि के साथ देखा।
गीता उपदेश एवं विश्वरूप दर्शन ने दिया आध्यात्मिक संदेश
समारोह में ‘गीता उपदेश’ एवं ‘विश्वरूप दर्शन’ पर आधारित प्रस्तुतियों ने भगवान श्रीकृष्ण के दार्शनिक एवं आध्यात्मिक स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। गीता उपदेश की प्रस्तुति के माध्यम से कर्म, कर्तव्य, धर्म और जीवन-दर्शन के शाश्वत संदेश को अभिव्यक्त किया गया।
वहीं विश्वरूप दर्शन की प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को प्रदान किए गए विराट आध्यात्मिक दृष्टिकोण तथा कर्तव्य-बोध को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित कर्म, धर्म और आत्मबोध के गहन विचारों को विद्यार्थियों एवं दर्शकों के समक्ष रचनात्मक रूप में रखा।
झांकियों का हुआ मूल्यांकन
सायं 6:00 से 7:00 बजे तक विभिन्न सदनों द्वारा तैयार की गई झांकियों का क्रमवार प्रदर्शन किया गया। झांकियों का मूल्यांकन निर्धारित मानदंडों के आधार पर निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। मूल्यांकन में विषय-वस्तु, रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, मंच-सज्जा, अभिनय, भावाभिव्यक्ति, कलात्मकता तथा श्रीकृष्ण के प्रसंगों के प्रभावी निरूपण जैसे विभिन्न पक्षों को ध्यान में रखा गया।
मूल्यांकन के आधार पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले सदनों का चयन किया गया तथा विजेता सदनों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
शिक्षकगण, स्टाफ एवं विद्यार्थियों की रही सक्रिय सहभागिता
समारोह के आयोजन में शिक्षा संकाय के छात्र सलाहकार डॉ. सोमू सिंह, प्रो. नागेन्द्र कुमार, डॉ. एच. के. माने, श्री आर. एन. शर्मा, प्रो. मीनाक्षी सिंह, डॉ. प्रतीक चौरसिया, डॉ. अजीत राय, डॉ. विनीता, प्रो. रश्मि चौधरी, डॉ. श्रुति पाण्डेय, डॉ. प्रियंका एवं डॉ. छाया सोनी सहित शिक्षा संकाय के शिक्षकगण एवं समस्त स्टाफ की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की व्यवस्था, मंच संचालन, रिपोर्ट लेखन, मंच-सज्जा एवं प्रबंधन तथा फोटोग्राफी सहित विभिन्न दायित्व विद्यार्थियों को सौंपे गए थे। विद्यार्थी समन्वयकों एवं स्वयंसेवकों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराया।
छात्रावास में रात्रि में होगी पूजा
समारोह के पश्चात् सायं 7:00 बजे के बाद छात्रावास के अंतःवासियों द्वारा छात्रावास के कॉमन रूम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। पूजा के पश्चात् प्रसाद वितरण किया जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा और सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं संदेश—धर्म, कर्तव्य, कर्म, प्रेम, करुणा और लोककल्याण—को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।