

वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के क्रम में मां तारा का विशेष पूजन-अनुष्ठान विधिविधानपूर्वक संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां तारा का आवाहन, पूजन एवं विशेष आहुतियां अर्पित कर लोककल्याण, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने मां तारा की महिमा बताते हुए कहा कि मां तारा साधक को सांसारिक संकटों से पार लगाने वाली शक्ति हैं। ‘तारा’ का अर्थ ही तारने वाली शक्ति से है। मां अपने भक्तों को भवसागर के कष्टों से मुक्त कर आध्यात्मिक उन्नति और परम ज्ञान की ओर ले जाती हैं। उन्होंने कहा कि मां तारा की उपासना संकटों से मुक्ति, भय के निवारण और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने बताया कि मां तारा को तांत्रिक साधनाओं की प्रमुख देवी माना गया है। वे साधक को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती हैं। मां तारा का एक स्वरूप नील सरस्वती के रूप में भी पूजित है। उनकी आराधना से वाक् शक्ति, बुद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के विकास की मान्यता है।
पूजन के दौरान वेदिका एवं यज्ञ मंडप में निर्धारित विधि के अनुसार विभिन्न पूजन संस्कार संपन्न किए गए। आचार्यों एवं विद्वान ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ मां तारा को विशेष आहुतियां समर्पित की गईं। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन एवं पूजन कर सुख-शांति, आरोग्य तथा परिवार की मंगलकामना की।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है। प्रत्येक महाविद्या शक्ति के विशिष्ट स्वरूप और साधना के अलग-अलग आयामों का प्रतिनिधित्व करती हैं। मां तारा साधक को संकटों से उबारने के साथ ही आत्मज्ञान एवं मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करती हैं।
सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर यज्ञ, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं। पूरा यज्ञ परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और देवी उपासना से आध्यात्मिक वातावरण में परिवर्तित हो गया है।
बृजभूषणानंद , रामलखन नागा, सच्चिदानंद तिवारी आदि पूजन अनुष्ठान में सम्मिलित हुए
यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी जी के नेतृत्व में पूजन हो रहा है