जीवंत होगा रोजमर्रा का संसार
ठहरी हुई चीजों में गति की तलाश, सुप्रिया मिस्त्री की पहली एकल प्रदर्शनी वाराणसी में आज से


वाराणसी। कुछ वस्तुएँ हमारे आसपास हर दिन मौजूद रहती हैं। हम उन्हें देखते भी हैं, इस्तेमाल भी करते हैं, लेकिन शायद ही कभी उनके भीतर छिपे रूप, रंग, बनावट और मौन को महसूस करते हैं। कलाकार की नजर वहीं ठहरती है, जहां आम नजर आगे बढ़ जाती है। अहमदाबाद की कलाकार सुप्रिया मिस्त्री (सिंह) ऐसी ही साधारण दिखने वाली वस्तुओं में छिपी असाधारण दृश्य संवेदनाओं को अपनी पहली एकल चित्रकला प्रदर्शनी ‘STILL LIFE IN MOTION – जहाँ निर्जीव वस्तुएँ जीवंत हो उठती हैं’ के माध्यम से सामने लाने जा रही हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय स्थित अहीवासी आर्ट गैलरी में प्रदर्शनी का शुभारंभ 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सुबह 11:30 बजे होगा। प्रदर्शनी 10 अक्टूबर तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। बता दें, यह आयोजन गुजरात राज्य ललित कला अकादमी के सौजन्य से हो रहा है।



प्रदर्शनी का उद्घाटन BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी करेंगे। प्रो. अरुण कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि होंगे। प्रख्यात कलाकार एवं पूर्व डीन प्रो. मृदुला सिन्हा, राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा तथा प्रो. सत्येन्द्र सिंह बौनी सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
नाम भले ही ‘स्टिल लाइफ’ हो, लेकिन सुप्रिया की कृतियों में ठहराव के भीतर भी गति महसूस होती है। रंगों का उतार-चढ़ाव, आकारों का आपसी रिश्ता, प्रकाश और छाया का खेल तथा सतहों की बनावट मिलकर उन वस्तुओं को एक नई दृश्य भाषा देते हैं, जिन्हें हम सामान्यतः निर्जीव मानकर अनदेखा कर देते हैं।
उनकी कलाकृतियों में एक्रेलिक, जलरंग, रंगीन पेंसिल और कॉफी पेंटिंग जैसे माध्यमों के साथ-साथ टिश्यू, मास्किंग, स्क्रैफिटो, ड्राई-ब्रश और टूथब्रश स्प्लैटर जैसी तकनीकों का प्रयोग प्रदर्शनी को विशेष बनाता है। कहीं रंगों की महीन परतें हैं, कहीं सतहों में खुरदुरापन, तो कहीं आकृतियों के बीच ऐसा तालमेल, जो स्थिर दृश्य में भी गति का भ्रम पैदा करता है।
शेठ सी.एन. कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स से फाइन आर्ट में डिप्लोमा प्राप्त सुप्रिया को कला शिक्षण का नौ वर्ष से अधिक अनुभव है। पांच वर्ष स्कूल आर्ट टीचर के रूप में कार्य करने के बाद अब वे अपने पति के साथ ‘Artistic Wave’ के जरिए युवा कलाकारों और फोटोग्राफरों को मंच एवं सहयोग प्रदान कर रही हैं। वे तीन से पांच वर्ष के छोटे बच्चों से लेकर वयस्कों तक को विभिन्न कला माध्यमों का प्रशिक्षण देती हैं। उनके विद्यार्थियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी हासिल किए हैं।
यह प्रदर्शनी केवल चित्र देखने का अवसर नहीं, बल्कि उन चीजों को नए सिरे से देखने का निमंत्रण भी है, जिन्हें हम रोज देखते हुए भी वास्तव में देख नहीं पाते।