20 सितंबर को शास्त्री घाट पर जुटेंगे सैकड़ों छात्र, युवा और बेरोजगार
वाराणसी, 18 सितंबर। गैर-भाजपा विचारधारा से जुड़े रोजगार, सामाजिक अधिकार अभियान के बैनर तले आगामी 20 सितंबर को प्रातः 11 बजे वाराणसी के शास्त्री घाट पर ‘सरकार जवाबदेह हो’ विषय पर नई पीढ़ी के साथ बृहद संवाद आयोजित किया जाएगा। संवाद में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, बेरोजगार, श्रमिक, किसान, महिलाएं एवं विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोग भाग लेंगे।
कार्यक्रम में निर्धारित 9 सूत्रीय एजेंडे के साथ दो अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। संवाद में विभिन्न गैर-भाजपा राजनीतिक दलों के प्रमुख स्थानीय नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी सहभागिता करेंगे।
संवाद के प्रमुख मुद्दे
- कॉरपोरेट एवं अति-धनाढ्य वर्ग की संपत्ति पर कर लगाया जाए, जनकल्याणकारी बजट बढ़ाया जाए तथा शिक्षा और रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
- रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन तथा भूमिहीनों को आवासीय भूमि का अधिकार सुनिश्चित हो। पेपर लीक एवं परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर प्रभावी रोक लगाई जाए तथा रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाए।
- न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए तथा अति-पिछड़े वर्गों के लिए अलग आरक्षण की व्यवस्था की जाए।
- प्राकृतिक संसाधनों की लूट एवं निजीकरण पर रोक लगे तथा पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। वनाधिकार कानून को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- प्रदेश से पूंजी पलायन पर रोक लगे तथा प्रदेश के बैंकों में जमा पूंजी का अधिकाधिक निवेश प्रदेश के विकास में किया जाए।
- माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा महिलाओं एवं युवाओं पर पड़ने वाले अनुचित आर्थिक बोझ एवं शोषण पर रोक लगाई जाए।
- स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं एवं युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाए।
- जनगणना में आदिवासी धर्म कोड तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जातीय कॉलम शामिल किया जाए।
- किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए तथा बुनकरों, गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, स्कीम वर्कर्स, निर्माण मजदूरों सहित तमाम असंगठित श्रमिकों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
- तहसील एवं चकबंदी न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं तथा न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
- मदरसा एवं पारंपरिक संस्कृत शिक्षा से संबद्ध विद्यालयों की दशा एवं दिशा में सुधार के लिए ठोस पहल की जाए और इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
आयोजकों ने छात्र-युवाओं, बेरोजगारों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े सभी लोगों से संवाद में भाग लेकर अपने विचार रखने की अपील की है।
विजय शंकर पाण्डेय
सदस्य, अध्यक्ष मंडल