
वाराणसी, 16 अगस्त 2026
सर्व धर्म मंदिर आश्रम, सिगरा – महमूररगंज, वाराणसी में रविवार, 16 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य तथा श्री सुयश जी महाराज जी के पावन जन्मदिवस के अवसर पर भव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में सतगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के आत्मानुभवी शिष्य महात्मा महादेवी बाई जी एवं महात्मा सुजाता बाई जी ने अपने प्रेरणादायी सत्संग विचारों से उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
सत्संग के दौरान महात्मा महादेवी बाई जी ने मनुष्य जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा— “बड़े भाग मानुष तन पावा।” उन्होंने रामायण के इस प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य शरीर अत्यंत दुर्लभ है और इसे बड़े सौभाग्य से प्राप्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि हाथी अत्यंत शक्तिशाली होता है और बड़े-बड़े वृक्ष एवं भारी वस्तुएँ उठा सकता है, शेर और चीता भी अपनी शक्ति, गति और सामर्थ्य के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन कहीं यह नहीं कहा गया कि “बड़े भाग हाथी तन पावा” या “बड़े भाग चीता तन पावा।” इसका कारण यह है कि मनुष्य शरीर ही ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा जीव परमात्मा को जानने और अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव करने का प्रयास कर सकता है। इसलिए मनुष्य जीवन को केवल भौतिक सुख-सुविधाओं में व्यर्थ न गंवाकर इसके आध्यात्मिक उद्देश्य को समझना चाहिए।
इसके बाद महात्मा सुजाता बाई जी ने अपने सत्संग विचार रखते हुए स्वतंत्रता दिवस एवं श्री सुयशजी महाराज जी के पावन जन्मदिवस की सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महापुरुष अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज के उत्थान, मानव कल्याण और जनसेवा के लिए इस धरती पर आते हैं। इतिहास में जितने भी महान संत-महापुरुष हुए हैं, उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य समाज को सही दिशा देना और मानव जीवन को सार्थक बनाना रहा है।
उन्होंने श्री सुयशजी महाराज जी के जीवन चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने बचपन से ही अध्यात्मिक जन जगृति और समाज सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। वे गांव-गांव, शहर-शहर और घर-घर जाकर लोगों की समस्याओं को समझने तथा उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जीवन में भौतिक उन्नति आवश्यक है, उसी प्रकार आध्यात्मिक उन्नति भी मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
महात्मा सुजाता बाई जी ने कहा कि जीवन में किस मार्ग का चयन किया जाए, इसका उत्तर शास्त्रों में भी मिलता है— “महाजनो येन गतः स पन्थाः।” अर्थात जिस मार्ग पर महापुरुष चले हैं, उसी सत्य एवं कल्याणकारी मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए ऐसे महापुरुष की खोज करें, जो मनुष्य को उसके भीतर स्थित दिव्य ज्योति का अनुभव करा सके और उसे परमात्मा के साक्षात्कार की दिशा में ले जाए।
कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक, भक्तिमय एवं राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सत्संग का लाभ लिया तथा स्वतंत्रता दिवस एवं श्री सुयशजी महाराज जी के पावन जन्मदिवस के अवसर पर मानव कल्याण, समाज सेवा एवं आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
