
वाराणसी, 05 अक्टूबर 2026
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन में आज राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI), BHU इकाई के तत्वावधान में अंग्रेजी हटाओ आंदोलन के प्रणेता एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष श्री देवव्रत मजूमदार ‘देबुदा’ की पुण्यतिथि के अवसर पर “अंग्रेजी हटाओ आंदोलन की विरासत और छात्र-युवजनों के मौजूदा सवाल” विषय पर विचार-विमर्श एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में छात्र राजनीति, भाषा, शिक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों तथा विश्वविद्यालयों में छात्र-युवाओं की भूमिका से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी हटाओ आंदोलन केवल भाषा का प्रश्न नहीं था, बल्कि यह भारतीय भाषाओं, समान अवसर, सामाजिक न्याय और आम विद्यार्थियों के सम्मान से जुड़ा व्यापक आंदोलन था।
मुख्य अतिथि विजय शंकर पांडे जी ने देबुदा के छात्र जीवन और अंग्रेजी हटाओ आंदोलन में उनकी भूमिका को स्मरण करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के निर्माण का केंद्र भी हैं।
इस अवसर पर प्रोफ़ेसर सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि एक छात्र नेता के रूप में छात्रों के मान-सम्मान, अधिकारों और विश्वविद्यालय की गरिमा की रक्षा करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी आपराधिक छवि वाले व्यक्ति, गुंडे या माफिया के सामने झुकना अथवा उनके पैर छूना छात्र शक्ति के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।
देबू दा के पुत्र ईशान मजुमदार ने कहा छात्र राजनीति का मूल चरित्र संघर्ष, स्वाभिमान, लोकतंत्र और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं एवं छात्र नेताओं ने कहा कि देबुदा की विरासत को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे वर्तमान छात्र-युवा आंदोलनों के सवालों से जोड़कर आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का स्वागत इकाई अध्यक्ष मुरारी कुमार, संचालन राणा रोहित और धन्यवाद ज्ञापन डा. विकास सिंह ने किया।
कार्यक्रम में डॉ रामजी सिंह जी, डॉ सुरेंद्र प्रताप,, शिव शक्ति , के डी न राय, अमन राय, रोसा के मीडिया प्रभारी आनंद मिश्रा, अर्पित, निक्सन, प्रियदर्शन मीना, वैभव, निशांत गुप्ता, गुलशन, आशुतोष सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं NSUI BHU के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
