वाराणसी 25. 08. 2026

वाराणसी में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान डॉक्टर शैलेश कुमार राय ने बताया कि आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड उत्तर प्रदेश में वर्ष 2020 से अप्रैल 2022 तक राज्य सरकार द्वारा कंट्रोलर नियुक्त था तथा डा. अखिलेश वर्मा 2017 से बोर्ड के रजिस्ट्रार प्रतिनियुक्ति पर है। इसी दौरान 15-15 लाख लेकर तमाम फर्जी पंजीयन हुये वर्ष 2021 में श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कालेज कुरुक्षेत्र हरियाणा के नाम से 41 लोगों के बी.ए.एम.एस. के मार्कसिट सर्टिफिकेट, प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन व हरियाणा बोर्ड की अनापत्ति प्रमाण पत्र सभी फर्जी बनाकर, फर्जी वेरिफिकेशन के आधार पर सभी 41 लोगों का पंजीयन रजिस्ट्रार द्वारा कर दिया गया जिसके आधार पर प्रैक्टिस कर रहे है।
फुरकान अली निवासी ग्राम व पोस्ट खोड़ जनपद रामपुर उत्तर प्रदेश द्वारा दिनांक 16-07-2024 को आयुष मंत्रालय भारत सरकार व अन्य संबन्धित से 05 फर्जी पंजीयन की लिस्ट के साथ शिकायत की गयी कि इनका फर्जी पंजीयन रजिस्ट्रार डा.अखिलेश कुमार वर्मा और कर्मचारीगण प्रवीण कुमार प्रजापति, प्रवीण कुमार, रमाकांत एवं डा. नरेंद्र कुमार के रैकेट द्वारा किया गया है। जिसके क्रम में अप्रैल 2025 के प्रथम सप्ताह में NCISM की टीम लखनऊ बोर्ड में आकर जांच किया तो शिकायत में उल्लिखित 05 फर्जी पंजीयन के साथ कुल 41 संदिग्ध पंजीयन फजीं पाये गए। जिसका वेरिफिकेशन करने पर सभी 41 के फर्जी होने की पुष्टि हुई और शिकायतकर्ता की शिकायत सत्य व सही पायी गयी ।
41 फर्जी पंजीयन की पुष्टि होने पर यू.पी. इंडियन मेडिसिन एक्ट 1939 की धारा 27 (4) के तहत पंजीयन निरस्त व उचित कार्यवाही हेतु रजिस्ट्रार को बोर्ड की बैठक दिनांक 25 अप्रैल 2025 मे रखना चाहिए था जिसे बोर्ड मे नहीं रखा और बोर्ड से छिपा लिया। तथा रजिस्ट्रार ने बिना क्षेत्राधिकार 17 अप्रैल 2025 को खुद अपने द्वारा किए गए 41 पंजीयन को निरस्त कर दिया। इतना ही नहीं संबन्धित जनपद के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को को FIR दर्ज करने का विधि विरुद्ध ढंग से पत्र देकर खानापूर्ति कर दिया और डेढ़ साल तक उसका कोई फालों-अप तक नहीं लिया । जबकि घटना स्थल बोर्ड था तो नियमतः सभी 41 के ऊपर एफ़आईआर स्थानीय थाना हुसैनगंज लखनऊ दर्ज करना चाहिए था। जिससे साफ जाहीर होता है की प्रथम दृष्टया रजिस्ट्रार फर्जीवाड़ा में शामिल है।
रजिस्ट्रार सुनियोजित ढंग से पंजीयन फर्जीवाड़ा को दबाये रखने के लिए प्रमुख सचिव आयुष व आयुष मंत्री को अपनी दुरभिसंधि में लेकर बोर्ड के एक्ट व मा. उच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत, मनमाने ढंग से बोर्ड का 28 अप्रैल 2025 से कार्यकाल नियमानुसार बढ़ने नहीं दिया और न ही बोर्ड को भंग होने दिया बल्कि अक्रियाशील बनाए रखा । इस दौरान मा. हाईकोर्ट में अनेकों याचिकाए दाखिल हुई औए बोर्ड के कार्यकाल बढ़ाने का आदेश होता रहा । इसी क्रम में मा. हाईकोर्ट ने दिनांक 20 मई 2026 को बोर्ड को बहाल कर दिया और बोर्ड कार्य करना शुरू कर दिया इसी दौरान बोर्ड के संज्ञान में 02 अगस्त 2026 को फर्जीवाड़ा आने पर बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. शैलेश कुमार राय द्वारा बोर्ड की आकस्मिक बैठक फर्जीवाड़ा के विषय पर दिनांक 10 अगस्त 2026 को बुलाई गयी और मा. मुख्यमंत्री व अन्य संबन्धित से रजिस्ट्रार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संगठित गिरोह बनाकर बोर्ड में चिकित्सक के रूप में फर्जी ढंग से पंजीयन करने-कराने एवं इस प्रकरण को दबाने में लिप्त प्रमुख सचिव आयुष व मा. आयुष मंत्री की भूमिका की सी.बी.आई. से जांच कराने एवं निष्पक्ष जांच हेतु तत्काल रजिस्ट्रार की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दंडित करने के लिए दिनांक 04 अगस्त 2026 लिखित शिकायत की गयी। जिसके उपरांत मा. हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद रजिस्ट्रार ने प्रमुख सचिव आयुष व आयुष मंत्री को दुरभिसंधि में लेकर दिनांक 10 अगस्त 2026 को बोर्ड को भंग कराकर कंट्रोलर नियुक्त करा लिया और चुनाव की घोषणा करा दी। जिसको मा. हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी है।
दबाव बनने पर लीपापोती करने की नियत से 22 अगस्त 2026 को कंट्रोलर महोदय ने 41 फर्जी पंजीकृत चिकित्सकों के विरुद्ध थाना हुसैनगंज लखनऊ मे FIR दर्ज हेतु तहरीर देकर खानापूर्ति किया है किन्तु उसमे पत्र दिनांक 16-07-2024 में फर्जीवाड़ा में शामिल नामजद रजिस्ट्रार डा. अखिलेश वर्मा व अन्य नामजद का नाम नहीं दिया गया है, न ही एन.आई.ए., जयपुर, राजस्थान के 10 एवं मंदसौर इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेदा मध्यप्रदेश 05 फर्जी पंजीयन का का उल्लेख किया है।
इतना सब कुछ होने के बावजूद प्रथम दृष्टया दोषी रजिस्ट्रार आयुष मंत्री के संरक्षण से बोर्ड में बना हुआ है और साक्ष्यों को नष्ट कर रहा है जबकि इनका 2026 में मेडिकल आफिसर से क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी के पद पर प्रमोशन हो चुका है रजिस्ट्रार का पद बाबू क्लर्क स्तर का है न की अधिकारी स्तर का है। रजिस्ट्रार कहता है की मेरा भाई जिला जज है और वर्तमान में मा. राज्यपाल उत्तर प्रदेश का प्रतिनियुक्ति पर विधिक सलाहकार है मेरी पहुँच न्यायपालिका, पुलिस व शासन-प्रशासन में है मेरा कोई कुछ नहीं कर पाएगा ।
चूंकि उपरोक्त से स्पष्ट है कि इस फर्जीवाड़ा में बहुत बड़ा शक्तिशाली अंतर राज्यीय रैकेट व प्रभावशाली लोग है इसलिए इसकी जांच सी.बी.आई. या किसी पुलिस एजेंसी द्वारा ही संभव है। हमे उम्मीद है की निष्पक्ष जांच होने पर हजारों फर्जी डाक्टर व एक बड़ा रैकेट व प्रभावशाली लोग पकड़े जाएगे। लेकिन अब तक की स्थिति को देखने से प्रकरण की लीपापोती होना ही प्रतीत हो रहा है। इसलिए मा. हाईकोर्ट में सी.बी.आई. या किसी पुलिस एजेंसी द्वारा, मा. हाईकोर्ट की निगरानी में जांच व कार्यवाई के लिए याचिका दाखिल की जा रही है। साथ ही साथ रजिस्ट्रार लगायत सभी 05 नामजद के विरुद्ध मेरे द्वारा थाना हुसैनगंज लखनऊ में FIR की तहरीर कल दी जाएगी । यह जानकारी डॉक्टर शैलेश कुमार राय द्वारा दी गई है
(डा. शैलेश कुमार राय)
निवर्तमान उपाध्यक्ष
केंद्रीय अध्यक्ष वायस आफ आयुर्वेद
सचिव- एजीटेशन कमेटी, N.I.M.A. सेंट्रल काउंसिल भारत