केयर हॉस्पिटल – जहाँ इलाज के साथ कभी-कभी जीवन की दिशा भी बदल जाती है।

आज से 16 वर्ष पहले, गाजीपुर की नन्ही आंचल, मात्र 5 वर्ष की उम्र में केयर हॉस्पिटल आई थी।
उसे अपने बाल खाने की आदत थी, जिसके कारण उसके पेट में बालों का बड़ा गुच्छा – ट्राइकोबेज़ोआर (Trichobezoar)
बन गया था।उसकी स्थिति ऐसी थी कि ऑपरेशन करना आवश्यक हो गया। केयर हॉस्पिटल, वाराणसी में उसका सफल ऑपरेशन और उपचार किया गया।इलाज ने आंचल को बीमारी से मुक्ति दी, लेकिन अस्पताल ने उसे जीवन के लिए एक नई प्रेरणा भी दी।
उस छोटी बच्ची के मन पर यहाँ की नर्सों की सेवा, स्नेह और अपनापन गहरी छाप छोड़ गया। डर और दर्द के उन दिनों में नर्सों के प्यार भरे शब्द उसके लिए दवा से कम नहीं थे

इलाज के बाद आंचल स्वस्थ हुई और धीरे-धीरे बाल खाने की आदत भी पूरी छूट गई।लेकिन जिन हाथों ने उसे संभाला था, उनकी ममता को वह कभी नहीं भूल पाइ.
शायद उसी समय उसके बालमन में एक छोटा-सा सपना जन्म ले चुका था। उसने निश्चय किया कि बड़ी होकर वह भी नर्स बनेगी और बीमार लोगों की इसी तरह सेवा करेगी।
समय बीतता गया और पाँच वर्ष की वह छोटी बच्ची आज 21 वर्ष की युवती बन चुकी है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि आंचल ने सचमुच नर्सिंग को अपना पेशा चुना। कभी जिस बच्ची को नर्स के सहारे और स्नेह की जरूरत थी, आज वही दूसरों की सेवा के लिए तैयार है।

और शायद जिंदगी को भी अपनी कहानी पूरी करनी थी। हाल ही में जब आंचल फिर अस्वस्थ हुई, तो 16 वर्षों बाद उसके कदम एक बार फिर उसी केयर हॉस्पिटल की ओर लौट आए। उस अस्पताल में, जहाँ कभी एक छोटी बच्ची को बीमारी से नया जीवन मिला था। आज आंचल को दोबारा देखकर केयर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. मृगेंद्र कुमार को केवल अपना पुराना मरीज नहीं, बल्कि अपनी सेवा और संस्कारों की एक जीवंत कहानी दिखाई देती है। कल की वह नन्ही मरीज आज नर्स बन चुकी है-क्योंकि कभी किसी नर्स की निःस्वार्थ सेवा ने उसके जीवन को छू लिया था।
आंचल की कहानी हमें सिखाती है-अच्छी नर्सिंग केवल मरीज को स्वस्थ करती, कभी-कभी वह एक नए सेवक एक नए उपचारकर्ता और एक नए इन्सान को जन्म देती है
“16 साल पहले जिन हाथों ने आंचल को संभाला था, उन्हीं हाथों की सेवा से प्रेरित होकर आज आंचल ने दूसरों को संभालना अपना जीवन बना लिया।”
केयर हॉस्पिटल – जहाँ इलाज के साथ कभी-कभी जीवन की दिशा भी बदल जाती है।