

काशी। पूज्य शंकराचार्य स्वामी जी महाराज ने आज के सत्संग में अपने प्रेरणादायक उपदेश के माध्यम से कहा कि अभिमान छोड़े बिना कोई सच्चा प्रेमी नहीं बन सकता। उन्होंने श्रीरामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई—
“रामहि केवल प्रेम पियारा।
जानि लेहु जो जाननिहारा॥”
की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम को केवल निष्कपट, निस्वार्थ और समर्पित प्रेम ही प्रिय है। जहां अहंकार और अभिमान है, वहां सच्चे प्रेम का पूर्ण विकास नहीं हो सकता। प्रभु प्रेम प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर विनम्रता, सेवा और पूर्ण समर्पण का भाव अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर चातुर्मास महाव्रत महोत्सव की आगामी महत्वपूर्ण तिथियों की भी जानकारी दी गई। उल्लेखनीय है कि चातुर्मास महाव्रत महोत्सव का शुभारंभ 28 जुलाई से हुआ है, जिसका समापन 28 सितंबर को होगा। इसी क्रम में 28 अगस्त, पूर्णिमा के पावन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
28 अगस्त की तिथि रामेश्वर मठ के लिए विशेष रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 28 अगस्त 1996 को ही पूज्य रामेश्वर मठ में पूज्य महाराज श्री का शंकराचार्य पद पर अभिषेक हुआ था। इस ऐतिहासिक और पावन अवसर की स्मृति में आयोजित काशी गुरु पूजन में भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु एवं भक्तगण काशी पहुंचकर सम्मिलित होंगे।
आज के सत्संग में मुख्य रूप से कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, प्रवक्ता विनय तिवारी एडवोकेट, कोषाध्यक्ष पुण्डरीक पांडेय, राममणि सारस्वत, स्टेशन अधीक्षक, सोनभद्र, इंजी. लवकुश मिश्रा, रीवा सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।