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नवसाधना में नृत्य-संगीत मिलन-2026 कार्यक्रम में गायन की स्वरांजलि संग नृत्य के सजे सतरंगी सितारे

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समूह लोक नृत्य और समूह गायन में दिखी साधना की झलक  

पुरस्कार पाकर चहके बाल कलासाधक,लहराया परचम, झटके पदक
वाराणसी। 06.11.2026

  • संगीत और नृत्य कला मनुष्य की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। बाल कला साधकों के निर्मल कोमल मन में बसे संगीत से ही जीवन में लय आता है। यह कहना है मुख्य अतिथि भरतनाट्यम की प्रसिद्ध गुरु श्रीमती माला होम्बल का। वह शुक्रवार को नवसाधना कला केन्द्र के मिलन हाॅल में आयोजित नृत्य-संगीत मिलन-2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में बाल कला साधकों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि संगीत और नृत्य भारत के कण-कण में बसा हुआ है। संगीत और नृत्य एक अद्भुत संसार का सृजन करता हैं। साहित्य, संगीत और नृत्य के कारण ही बच्चों को वास्तविक जीवन का अनुभव मिलता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वाराणसी धर्म प्रान्त के बिशप यूजिन जोसफ ने कहा कि संगीत का साधक सदैव समर्पित जीवन जीता है। इस समर्पण का कारण संवदेना है। यह संवेदना भावी पीढ़ी तक निरंतर पहुंचती रहनी चाहिए, क्योंकि यह उन्हें जीवन जीने की कला सिखाती है। नृत्य-संगीत और कला के कारण ही व्यक्ति के भीतर आध्यामिकता का सृजन होता है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और प्रार्थना नृत्य से हुआ। भरतनाट्यम नृत्य विधा में ‘सात सुरों का संगम’ गीत के बोलों पर अनुजा, सि. अलीशा, शोभा, रोनिता, मेघा, रेनू, अनीशा, खुशबू, रिया, श्वेता, और निक्की ने प्रार्थना नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य का संयोजन गुरु मीरा माधवन ने किया। नवसाधना की ओर से बाल कलासाधकों के लिए भरतनाट्यम नृत्य विधा में नृत्य नाटिका सृजनहार प्रस्तुत किया गया। बाइबिल की कथा पर आधारित इस नृत्य को अल्मा, अनीशा, खुशबू, सृष्टि, रिया, रेनू, एलीन, शोभा, श्वेता, रोनिता, मेघा, कैटरीना, सि. अलीशा और रेखा ने प्रस्तुत किया। नृत्य संयोजन गुरु प्रार्थना सिंह ने और निर्देशन फा. एस. जोसफ ने किया।
नृत्य संगीत मिलन-2026 में कलासाधकों ने अपनी प्रतिभा का अप्रतिम प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों के उम्दा कला प्रदर्शन को तीन श्रेणियों में करतल ध्वनि से विजेता घोषित किया गया। पुरस्कार पाने वाले बाल कलासाधकों को दर्शक उत्साहित करती रहे। कलासाधकों ने कुल 30 पदकों पर कब्जा किया।
समूह गायनः-
जूनियर वर्ग में (समूह गायन) में प्रथम स्थान पर सेंट जॉन्स स्कूल बीएलडब्ल्यू व द्वितीय स्थान पर सेंट मैरी स्कूल कैंट, वाराणसी, तृतीय स्थान पर सेंट पॉल कॉन्वेंट स्कूल रहा।
सीनियर वर्ग (समूह गायन) में सेंट मैरी स्कूल सोना तालाब, वाराणसी को प्रथम, सेंट जॉन्स स्कूल मड़ौली को द्वितीय और सेंट मैरी स्कूल गाजीपुर को तृतीय स्थान मिला।
समूह लोक नृत्यः-
जूनियर वर्ग में (समूह लोक नृत्य) में प्रथम स्थान पर सेंट फ्रांसिस स्कूल रामनगर, दूसरे स्थान पर सेंट जॉन्स स्कूल मड़ौली, और तीसरे स्थान पर सेंट पॉल स्कूल क्राइस्ट नगर रहा।  
सीनियर वर्ग में (समूह लोक नृत्य) में प्रथम स्थान पर सेंट मैरी स्कूल सोनतालाब व द्वितीय स्थान पर लूर्डेस इंटर कॉलेज गाज़ीपुर और तृतीय स्थान पर सेंट जॉन्स स्कूल लेढूपुर की टीम रहीं।
रंग बिरंगे परिधानों में बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पंजाबी भांगड़ा, डांडिया, राजस्थानी कालबेलिया, मयूर व झूमर नृत्य ने देश की लोक व शास्त्रीय कला का दर्शन कराया। कई बाल कलाकारों ने देश भक्ति के भावों को बखूबी प्रस्तुत किया। जूनियर वर्ग में छठवीं से आठवीं और सीनियर वर्ग मे नौवीं से बारहवीं कक्षा के बाल कलासाधक शामिल थे।
कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में शास्त्रीय हिन्दुस्तानी गायन के लिए प्रो. गोविंद कुमार वर्मा, प्रो. आशुतोष मिश्र, श्रीमती अनीता और लोक नृत्य के लिए डाॅ. अमृत मिश्र, प्रो. प्रार्थना सिंह, प्रो. मीरा माधवन शामिल रहीं। सभी विजेताओं को पदक और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
स्वागत बीएलडब्ल्यू स्कूल के प्रधानाचार्य फादर गुरु संत राज ने और प्रतियोगिता में समूह गायन और समूह लोक नृत्य के नियमों को फादर थाॅमस मैथ्यू ने बताया।
नवसाधना कला केन्द्र के निदेशक डाॅ. फादर रोजन सेबास्टियन ने नवसाधना कला केन्द्र की स्नातक और परास्नातक शिक्षा व्यवस्था, गुरु-शिष्य परम्परा और कला को रोजगार से जोड़ने के संबंध में विस्तार से बताया। इस मौके पर सभी गणमान्य अतिथियों को सम्मानित किया गया।
मंच संचालन आशुतोष पाण्डेय, अनीशा और फ्लोरेंस ने किया और धन्यवाद ज्ञापन सिस्टर जमीला ने किया।
प्रोविंसियल सि. मेबेल, सि. शीला, सि. एनी, सि. वीणा, फा. अभिषिक्त आनंद, फा. जैकब अराहना, फा. एस जोसेफ, सिस्टर जमीला, सि. सरला, सि. मंजू, सि. लुसी, सि क्रिस्टी, समेत सभी विद्यालयों के संगीत नृत्य के शिक्षक प्रशिक्षक और प्रिंसिपल मौजूद रहे।

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