

सेवा से शिक्षा को व्यापार बना दिया गया – आनंद दीपायन
पूर्वांचल के 10 जिलों से युवा प्रतिनिधि शामिल
जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा सच नहीं – नृपेंद्र मिश्रा
वाराणसी, 1 नवंबर 2026, देश में असमानता तेजी से बढ़ रही है। ऊपरी 10 फीसद लोगों की पूंजी में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है वहीं नीचे की 50 फीसद आबादी की हालत खराब है। देश में जीडीपी वृद्धि दर के सरकार चाहे जो दावे करें सच्चाई यह है कि आम आदमी की आमदनी और रोजगार के अवसरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। यूपी सरकार द्वारा एक ट्रिलियन डालर इकोनामी और भारत सरकार द्वारा 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी बनाने की घोषणा असंभव है। इसके लिए करीब 19 प्रतिशत की ग्रोथ रेट चाहिए जो दिवास्वप्न है। यह बातें आज वाराणसी के यथार्थ होटल में रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान (रोसा) द्वारा आयोजित पूर्वांचल के 10 जिलों के नौजवानों के नई पीढ़ी संवाद को संबोधित करते हुए बीएचयू के प्रोफेसर नृपेंद्र किशोर मिश्रा ने कहीं। उन्होंने कहा कि पूंजी का संकेंद्रण कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथों में बढ़ रहा है और इसके कारण कॉर्पोरेट के बीच के अंतर्विरोध भी मुखर होकर सामने आ रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, एमएसएमई और उद्योग पर सरकार का खर्च लगातार कम हो रहा है। देश से कॉर्पोरेट घराने अपनी पूंजी लेकर विदेश में पलायन कर रहे हैं लगातार विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ रही है। वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट का शिकार है। नौजवानों से उन्होंने अपील की कि नीति निर्माण में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अपने अधिकारों के लिए उन्हें संगठित होने और एक बड़े बदलाव के लिए खड़ा होना चाहिए। संवाद का संचालन काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह ने किया। उनकी मदद राजेश सचान और शम्मी कुमार सिंह कर रहे है।
नई पीढ़ी संवाद में शिक्षा नीति के संदर्भ में उच्च शिक्षा के संकट विषय के दूसरे सत्र पर बीएचयू के प्रोफेसर आनंद दीपायन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पूरी दुनिया में शिक्षा जो मुख्यतः सेवा का क्षेत्र था उसे आज व्यापार बना दिया गया है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार पूरी दुनिया में करीब 7 लाख करोड डॉलर का शिक्षा का व्यापार है। अब इसमें वर्ल्ड बैंक खुद पैसा लगाने जा रहा है जो भारत के पूरे एजुकेशन सिस्टम को तबाह कर देगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य उत्पादकता और कौशल बढ़ाने वाला होना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देकर ही राष्ट्र का विकास संभव है। कहा कि हमारे देश में 35 साल की उम्र के 65 पर्सेंट युवा हैं लेकिन हम उनका महज 21 फ़ीसदी ही उपयोग कर पाते हैं। एक बार पुन: जीडीपी के 6 प्रतिशत को शिक्षा पर खर्च करने की बात उठाते हुए कहा कि शिक्षा पर बजट में शेयर लगातार घट रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की हालत तो और भी खराब है उन्हें लगातार स्वायत्तशासी और अपना संसाधन जुटाने के लिए नीतियां बनाई जा रही है जो उच्च शिक्षा को आम लोगों से दूर करेगा।
नई पीढ़ी संवाद में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, संपूर्णानंद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष विजय शंकर पांडे, प्रोफेसर श्रीकांत पांडे, नसीम खान डॉक्टर सरफराज, समाजवादी अरुण कुमार मिश्रा,रोसा के मीडिया प्रभारी आनंद मिश्रा, अरविंद किशोर राय, योगीराज पटेल, पंकज चौरसिया, राणा रोहित, सत्यम प्रजापति, रामधनी बिंद, तिलकधारी बिंद, डॉक्टर अनिल उपाध्याय, कुंवर सुरेश सिंह, श्रीश मिश्रा छोटा अधिवक्ता आनन्द शंकर मिश्रा आदि प्रमुख लोग और वाराणसी समेत 10 जिलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। अति पिछड़ों की सामाजिक आर्थिक स्थिति और आदिवासियों के मूल अधिकार व पहचान पर भी आज चर्चा होगी