
देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने हर्बल चिकित्सा, औषधि खोज तथा आधुनिक अनुसंधान की उभरती संभावनाओं पर किया विचार-विमर्श।
वाराणसी, 1 नवंबर 2026: हर्बल औषधि अनुसंधान में नवीनतम प्रगति पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन रिसेंट एडवांसमेंट इन हर्बल ड्रग रिसर्च (IC-RAHDR-2026) का आज काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के आयुर्विज्ञान संस्थान (IMS) स्थित प्रो. के.एन. udappa सभागार में भव्य शुभारंभ हुआ। 1 से 3 नवंबर 2026 तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से प्रतिष्ठित शिक्षाविद, प्रख्यात वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधार्थी तथा विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हर्बल औषधियों की खोज, विकास, चिकित्सीय उपयोगिता तथा इस क्षेत्र में हो रहे नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों और तकनीकी प्रगति पर विचार-विमर्श करना है।
उद्घाटन समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. मनोरंजन साहू, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, प्रो. इरीना वी. ग्रेवल, सेचेनोव विश्वविद्यालय, मॉस्को, रूस, विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं। समारोह में सम्मानित अतिथियों के रूप में प्रो. के.एन. द्विवेदी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू तथा प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों में प्रो. एस.एन. संखवार, निदेशक, आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू तथा प्रो. के.एच.एच.वी.एस.एस. नरसिम्हा मूर्ति, संकायाध्यक्ष, आयुर्वेद संकाय, आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू की उपस्थिति रही। सम्मेलन का संयोजन प्रो. अनिल कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, द्रव्यगुण विभाग, आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू द्वारा किया जा रहा है, जबकि डॉ. राजेश सिंह, द्रव्यगुण विभाग, बीएचयू इस सम्मेलन के आयोजन सचिव की भूमिका निभा रहे हैं।
उद्घाटन समारोह का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रो. अनिल कुमार सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया तथा डॉ. राजेश सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने अपने संबोधन में हर्बल औषधियों के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, विभिन्न विषयों के बीच अंतर्विषयी सहयोग तथा प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धति के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर सम्मेलन की सार-पुस्तिका (Abstract Book) का विमोचन तथा एकेडमी ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी साइंसेज का उद्घाटन भी किया गया।
सम्मेलन के प्रथम दिवस आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। इनमें हर्बल औषधि अनुसंधान, औषधीय पौधों की प्रामाणिकता एवं पहचान, पादप रासायनिक घटकों का विश्लेषण, प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित कैंसररोधी औषधियों की खोज, औषधीय एवं औषध-क्रियात्मक मूल्यांकन, हर्बल औषधीय फॉर्मूलेशन तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ एकीकृत करने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण सेचेनोव विश्वविद्यालय, मॉस्को, रूस की प्रो. इरीना वी. ग्रेवल सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहभागिता है। इसके अतिरिक्त देश के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया है। यह सम्मेलन शोधकर्ताओं एवं वैज्ञानिकों को अपने नवीन अनुसंधान निष्कर्षों के आदान-प्रदान, वैज्ञानिक अनुभव साझा करने तथा विभिन्न विषयों के बीच अनुसंधान सहयोग की नई संभावनाओं को विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक एवं हर्बल ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धतियों के साथ जोड़कर सुरक्षित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हर्बल औषधियों के विकास को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही सम्मेलन शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों तथा वैज्ञानिक संगठनों के मध्य अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा l