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सनबीम शिक्षण समूह में प्रख्यात लेखक अमिश त्रिपाठी का भव्य स्वागत, ‘ध्रुव-तारा’ के माध्यम से विद्यार्थियों को कराया भारतीय इतिहास से परिचित

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‘द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज़’ ने विद्यार्थियों में जगाई इतिहास को जानने और समझने की नई जिज्ञासा

वाराणसी, 9 अक्टूबर 2026।
विद्यार्थियों में पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने, भारतीय इतिहास एवं संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करने तथा ज्ञान को रोचक एवं संवादात्मक माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से सनबीम शिक्षण समूह द्वारा एक विशेष साहित्यिक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के सुप्रसिद्ध लेखक अमिश त्रिपाठी ने सनबीम की विभिन्न शाखाओं में विद्यार्थियों से संवाद किया।

यह विशेष कार्यक्रम 7 अक्टूबर को सनबीम स्कूल भगवानपुर एवं सनबीम सनसिटी, 8 अक्टूबर को सनबीम स्कूल लहरतारा एवं सारनाथ तथा 9 अक्टूबर को सनबीम स्कूल वरुणा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को प्रख्यात लेखक से सीधे संवाद करने, उनके विचार सुनने तथा भारतीय इतिहास को एक नए और रोचक दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

सनबीम शिक्षण समूह के विभिन्न शाखाओं में अमिश त्रिपाठी की नवीनतम पुस्तक ‘ध्रुव -तारा’ का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए ‘द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज’ का आयोजन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

‘ध्रुव-तारा’ भारत के इतिहास से जुड़ी रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारियों से समृद्ध पुस्तक है। इस पुस्तक के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की गौरवशाली विरासत, इतिहास, संस्कृति और सभ्यता को रोचक ढंग से जानने-समझने का अवसर मिला।

इस अवसर पर सनबीम शिक्षण समूह के चेयरपर्सन डॉ0 दीपक मधोक ने इस अवसर पर कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि वह वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकों को अपना साथी बनाने और निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया।

वाइस चेयरपर्सन श्रीमती भारती मधोक ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ साहित्य, इतिहास और समसामयिक ज्ञान से उनका जुड़ाव भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अमिश त्रिपाठी जैसे लोकप्रिय लेखक से संवाद विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और स्मरणीय अनुभव रहा।

इस अवसर पर सनबीम शिक्षण समूह की निदेशिका श्रीमती अमृता बर्मन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना और उन्हें अपनी समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना विद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों की जिज्ञासा को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें पुस्तकों और ज्ञान की दुनिया से जोड़ने का कार्य करते हैं।

विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ0 अनुपमा मिश्रा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, पढ़ने, विचार करने और अपनी जड़ों को समझने की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से अच्छी पुस्तकें पढ़ने तथा प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण यह भी रहा कि अमिश त्रिपाठी ने कुछ पुस्तकों पर स्वयं हस्ताक्षर किए, जिससे विद्यार्थियों का उत्साह और बढ़ गया। लेखक के साथ संवाद और उनकी पुस्तक पर हस्ताक्षर प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा।

सनबीम शिक्षण समूह की यह पहल विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर पुस्तक, इतिहास, संस्कृति और विचार की व्यापक दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुई। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में इतिहास को रटने के बजाय उसे जानने, समझने और उसके पीछे छिपी कहानियों को खोजने की नई जिज्ञासा उत्पन्न की।

इस अवसर का संदेश स्पष्ट रहा-
“इस दशहरे, बच्चों को केवल उपहार नहीं, पढ़ने की खुशी और अपनी गौरवशाली विरासत को जानने का अवसर दें।”

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