
वाराणसी में मानव कल्याण के लिए आयोजित पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा का भव्य शुभारंभ मंगलवार को हो गया है। इस अवसर पर दुर्गाकुंड स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर से एक विशाल और भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक परिवेश में सजी सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर इस यात्रा में हिस्सा लिया। रास्ते भर ‘हर हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के गगनभेदी उद्घोष से पूरा इलाका शिवमय हो गया। गाजे-बाजे के साथ सजे हुए रथ पर कथा व्यास और सिर पर पवित्र ग्रंथ (पोथी) उठाए यजमान आगे बढ़ रहे थे। यह यात्रा दुर्गाकुंड और दयाल टावर से होते हुए आनंद पार्क स्थित मुख्य कथा स्थल पर पहुंची। कथा स्थल पर पहुंचने के बाद विधिवत रूप से शिव महापुराण कथा का शुभारंभ किया गया।

इस दौरान व्यासपीठ का पूजन और आरती कौशल्या देवी, अनीता और विनोद सुनेजा द्वारा संपन्न की गई। कथा का प्रवचन करते हुए कथा प्रवक्ता पंडित शिवम शुक्ला ने कहा कि कलयुग में मनुष्यों के पापों का नाश करने और उन्हें मोक्ष प्रदान करने के लिए शिव महापुराण कथा का श्रवण सबसे उत्तम साधन है। इसके श्रवण से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। उन्होंने आगे कहा कि जिस भी स्थान पर शिव महापुराण की कथा होती है, वह भूमि तीर्थ के समान पवित्र हो जाती है और वहां के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। इस भव्य आयोजन में गीता प्रेस के कृष्ण कुमार खेमका, सतपाल, राज, राजीव कटारिया, राकेश कालरा और वंश कुमार सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य लोग और शिव भक्त उपस्थित रहे।
