
अभिनन्दन समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, अपितु शक्ति-वर्धन का आधार है — कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा
श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् विश्व के नेतृत्व की दिशा में अग्रसर — पं. छोटेलाल त्रिपाठी
॥ काशी ॥
श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् द्वारा भव्य अभिनन्दन समारोह, हरिवंश पुराण कार्यशाला एवं महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति सम्पन्न
वाराणसी। श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् (संस्थापित — श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट, काशी, उ.प्र.) के तत्वावधान में आज योगसाधना भवन, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में दो दिव्य एवं गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुए।
मध्याह्न 12:15 बजे — हरिवंश पुराण कार्यशाला का विशेष सत्र तथा वेद विभाग द्वारा संचालित महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई।
अपराह्न 2:30 बजे — भव्य अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया।
मुख्य अभिनन्दनीय व्यक्तित्व — परमश्रद्धेय श्रीमहन्त वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री जी महाराज का उद्बोधन
राष्ट्रीय अध्यक्ष, धर्माचार्य प्रकोष्ठ, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा तथा महाराष्ट्र प्रदेश प्रमुख, अखिल भारतीय सन्त समिति, परमश्रद्धेय श्रीमहन्त वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री जी महाराज ने अपने अभिनन्दन के प्रत्युत्तर में उद्बोधित करते हुए कहा—
“आज काशी नगरी में आकर बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ जी के दर्शन के उपरान्त, ज्ञान की सर्वाधिक प्राचीन विद्या की मातृसंस्था सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में, श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् द्वारा किया गया यह अभिनन्दन हमारे लिए अत्यन्त गौरव एवं हर्ष का विषय है। इस परिषद् का संचालन एक सिद्ध सन्त के नाम पर स्थापित श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के माध्यम से हो रहा है, यह अपने आप में अत्यन्त गौरवपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि इस अभिनन्दन से केवल उनका व्यक्तिगत मान-सम्मान ही नहीं बढ़ा, बल्कि अनेक सन्त-परम्पराओं का सम्मान हुआ है। उन्होंने कहा, “हमारा अभिनन्दन करके परिषद् ने सनातन धर्म, संस्कृति एवं परम्परा के संरक्षण के लिए हमें और अधिक शक्ति प्रदान की है। पिछले कुछ वर्षों से नासिक-त्र्यंबकेश्वर जैसे कुम्भ क्षेत्रों का सरकारों द्वारा जिस प्रकार अपेक्षित शास्त्रीय मर्यादाओं के अनुरूप संचालन नहीं किया गया, उसके दृष्टिगत अब समय आ गया है कि परिषद् के विद्वान शास्त्रीय एवं धर्मसम्मत पद्धति से ऐसे आयोजनों के संचालन एवं व्यवस्थापन के लिए सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करें।”
स्वामी जी ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के गौरव का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व की प्राचीनतम एवं गौरवशाली संस्कृत संस्थाओं में प्रतिष्ठित इस विश्वविद्यालय को अब तक केन्द्रीय एवं राष्ट्रीय ही नहीं, अपितु अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का स्वरूप प्राप्त हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कुलपति महोदय की कार्यदक्षता एवं सक्रियता को देखते हुए उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यह विश्वविद्यालय शीघ्र ही अपने संकल्प एवं अपेक्षित उत्कर्ष को प्राप्त करेगा।

इस अवसर पर परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष पं. कमलाकान्त त्रिपाठी जी ने स्वामी जी के अभिनन्दन-पत्र का वाचन करते हुए उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, आध्यात्मिक साधना एवं विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे विशिष्ट योगदान का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया।
सम्मानित अतिथि — माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा जी का उद्बोधन
सम्मानित अतिथि के रूप में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा जी ने परिषद् द्वारा प्राप्त अभिनन्दन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा—
“यह सम्मान विश्वविद्यालय के संवर्धन एवं उत्कर्ष के लिए हमें और अधिक प्रेरणा तथा बल प्रदान करेगा। हमारे सम्मान के अवसर पर महाराष्ट्र से पधारे महन्त वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री जी महाराज ने विश्वविद्यालय के उत्कर्ष के लिए जिस संकल्प का समर्थन किया तथा श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के प्रस्ताव का जिस प्रकार अनुमोदन किया, यह हम सभी के लिए अत्यन्त प्रसन्नता एवं गौरव का विषय है।”
कुलपति महोदय के अभिनन्दन-पत्र का वाचन प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी जी ने किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कुलपति महोदय के व्यक्तित्व, कृतित्व, विद्वत्ता, प्रशासनिक दक्षता एवं विश्वविद्यालय के विकास के प्रति उनके समर्पण पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय उद्बोधन एवं प्रस्तावना वक्तव्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परिषद् के अध्यक्ष पं. छोटेलाल त्रिपाठी जी ने श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के विविध कार्यों, उद्देश्यों एवं भावी योजनाओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि परिषद् सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, शास्त्रीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण-संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने के संकल्प के साथ निरन्तर आगे बढ़ रही है।
इससे पूर्व कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी एवं गुरुकुल एवं मन्दिर सेवा योजना प्रमुख, जम्मू-कश्मीर प्रान्त, डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने परिषद् की स्थापना के उद्देश्य एवं उसकी कार्यदृष्टि पर प्रकाश डालते हुए कहा—
”काशी में इतनी परिषदों के विद्यमान रहते हुए भी इस परिषद् के संचालन की आवश्यकता क्यों पड़ी?”
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिषद् किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं, अपितु काशी की सभी विद्वत् एवं धर्मपरिषदों की पूरक शक्ति के रूप में कार्य करने के उद्देश्य से गठित की गई है। परिषद् का मूल ध्येय ”गुरुकुल से गाँव तक, शास्त्र से समाधान तक” की संकल्पना को साकार करना है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जैसे सीमांत क्षेत्रों में सूने पड़े मन्दिरों में अर्चक-प्रशिक्षण एवं नित्य-पूजा की पुनर्स्थापना सहित विभिन्न समाजोपयोगी एवं धर्म-संस्कृति संरक्षण से जुड़े कार्यों को गति प्रदान करना परिषद् के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित है।
अन्य गरिमामयी उपस्थिति एवं सम्मान
इस अवसर पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने स्वामी जी के अभिनन्दन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस गरिमामय आयोजन के लिए परिषद् का अभिनन्दन किया तथा समस्त सभा सहित परिषद् के प्रति आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के अवसर पर काशी के अनेक मूर्धन्य विद्वानों का पूजन, अभिनन्दन एवं सम्मान भी किया गया। इस सम्मान समारोह का गरिमापूर्ण संचालन परिषद् के प्रवक्ता पं. विजय शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अन्त में उपस्थित समस्त विद्वज्जनों, अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन परिषद् के कार्यालय मंत्री पं. दुर्गेश पाठक जी ने किया।
इस अवसर पर प्रो. सुधाकर मिश्र जी, प्रो. रामप्रिय पाण्डेय, डॉ. उमंग नाथ शर्मा, प्रो. महेन्द्र नाथ पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग सहित शताधिक विद्वान्, आचार्य एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सम्पूर्ण आयोजन में सनातन धर्म, वैदिक परम्परा, शास्त्रीय ज्ञान एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के प्रति विद्वज्जनों, सन्त-महात्माओं एवं उपस्थित गणमान्यजनों की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
पं. ज्ञानेन्द्र सापकोटा
महामन्त्री, श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद्