Nandi News

भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाकर शंकराचार्य स्वामी ने समझाया अटूट भक्ति और विश्वास का महत्व

Share on Social Media


काशी। रामेश्वर मठ में चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत नित्य प्रति आयोजित हो रहे सत्संग में अनंत श्रीविभूषित काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने आज श्रद्धालुओं को भक्त प्रह्लाद की पावन कथा सुनाई। महाराज श्री ने प्रह्लाद के चरित्र के माध्यम से भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास, भक्ति और सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहने का संदेश दिया।
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान के प्रति अपनी भक्ति और विश्वास को नहीं छोड़ा। पिता हिरण्यकशिपु द्वारा अनेक प्रकार की यातनाएं दिए जाने के बावजूद प्रह्लाद के मन में भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण अडिग रहा। उनकी भक्ति ने यह सिद्ध किया कि सच्चा भक्त परिस्थितियों से नहीं, बल्कि अपने विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण से पहचाना जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रह्लाद की कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, मनुष्य को सत्य, धर्म और ईश्वर भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। जब भक्त का विश्वास अटूट होता है तो भगवान अपने भक्त की रक्षा करते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुखों और चिंताओं में उलझकर अपने आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में प्रह्लाद जैसे भक्तों का चरित्र हमें धैर्य, संयम, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। सत्संग के माध्यम से मनुष्य को अपने जीवन में सकारात्मक विचारों और आध्यात्मिक संस्कारों को अपनाने का अवसर मिलता है।
सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल
कथा एवं सत्संग में मुख्य रूप से कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, प्रवक्ता विनय तिवारी एडवोकेट, सुशील शुक्ला, राममणि सारस्वत, स्टेशन अधीक्षक, आचार्य अनुज मिश्रा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव के श्रीमुख से भक्त प्रह्लाद की कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक संदेश प्राप्त किया और उनका आशीर्वाद लिया।
पूज्य शंकराचार्य जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि चातुर्मास महाव्रत के इस पावन काल में नियमित रूप से सत्संग, स्वाध्याय, भक्ति, सेवा और साधना करें तथा अपने जीवन में सत्य एवं सदाचार को स्थान दें।
रामेश्वर मठ में गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रारंभ हुआ चातुर्मास महाव्रत 28 सितंबर तक निरंतर चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल सत्संग, आध्यात्मिक चर्चा, साधना एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

Leave a Comment