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विश्वास ही प्रेम का पिता है” — जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज

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काशी,11.08.2026

चातुर्मास महाव्रत के पावन अवसर पर रामेश्वर मठ में नित्य प्रति चल रहे सत्संग में अनंत श्रीविभूषित काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेम, विश्वास और आध्यात्मिक जीवन का गूढ़ संदेश प्रदान किया।
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि “विश्वास ही प्रेम का पिता है।” उन्होंने समझाया कि जिस संबंध की नींव विश्वास पर रखी जाती है, उसी में सच्चे प्रेम, आत्मीयता और समर्पण का विकास होता है। विश्वास के अभाव में प्रेम भी स्थायी नहीं रह सकता। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में विश्वास, सद्भाव, सेवा और समर्पण के भाव को मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय आत्मचिंतन, साधना, स्वाध्याय और सत्संग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नियमित सत्संग मनुष्य के जीवन को संस्कारित करता है तथा उसे सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
सत्संग में मुख्य रूप से कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, प्रवक्ता एडवोकेट विनय तिवारी, देव दीक्षित, राजेंद्र सिंह (मुंबई), रामाधार दूबे (मिर्जापुर), गरिमा दूबे, डायरेक्टर अन्नपूर्णा प्रसादम सहित भारत के कोने-कोने से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास महाव्रत का शुभारंभ गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर हुआ था। यह पावन चातुर्मास महोत्सव 28 सितंबर तक रामेश्वर मठ में निरंतर चलेगा, जिसमें प्रतिदिन सत्संग, आध्यात्मिक चर्चा, साधना एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु रामेश्वर मठ पहुंचकर पूज्य गुरुदेव के श्रीमुख से आध्यात्मिक वचनों का श्रवण कर रहे हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

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