
अनंत श्रीविभूषित काशीधर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री काशीधर्म पीठ रामेश्वर मठ, अस्सी, वाराणसी में चल रहे चातुर्मास महाव्रत के दशम दिवस का सत्संग श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।
सत्संग में पूज्य गुरुदेव भगवान ने ब्रह्मसूत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मसूत्र वेदांत दर्शन का महत्वपूर्ण आधार ग्रंथ है, जिसके माध्यम से ब्रह्म, जीव, जगत और परम सत्य के स्वरूप को समझने का मार्ग प्रशस्त होता है।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप और परम सत्य को जानना है। शास्त्रों का अध्ययन, मनन और गुरु के मार्गदर्शन में उनका आचरण ही साधक को आत्मज्ञान की दिशा में आगे ले जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से चातुर्मास की इस पवित्र अवधि में स्वाध्याय, साधना, सत्संग एवं आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत प्रतिदिन पादुका पूजन, गुरुदर्शन, सत्संग एवं प्रसाद वितरण का आयोजन निरंतर जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामेश्वर मठ पहुंचकर पूज्य गुरुदेव के आशीर्वचन का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
