
वाराणसी।
अखिल भारतीय संत समिति ने सनातन धर्म और साधु-संत समाज के खिलाफ हो रहे निरंतर षड्यंत्रों का कड़ा प्रतिउत्तर देने का ऐलान किया है। काशी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में समिति ने स्पष्ट किया कि सनातन विरोधी ताकतों को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी संकल्प के साथ पूरे देश में “सनातन शंखनाद” अभियान की शुरुआत की घोषणा की गई।
राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा, “आप इसे भगवान आदि शंकराचार्य के शंकर दिग्विजय का दूसरा चरण मान सकते हैं। संतों ने अब अपनी दशकों पुरानी चुप्पी तोड़ दी है और वे सनातन धर्म के हर शत्रु से पूरी सख्ती से निपटने के लिए तैयार हैं।”
इस अवसर पर जगद्गुरु बालक दास ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने संसद परिसर में पप्पू यादव द्वारा किए गए कृत्य को भगवान राम और सनातन धर्म का अपमान बताते हुए इसे अक्षम्य अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी सच्चा हिंदू इस कृत्य को कभी भूल नहीं सकता, क्योंकि इससे करोड़ों देशवासियों की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं। जगद्गुरु ने मंच से चेतावनी दी कि यदि पुलिस पप्पू यादव को तत्काल गिरफ्तार नहीं करती है तो संत समाज इस पूरे मामले की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेगा। संत समाज ने राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, राहुल गांधी और अवधेश प्रसाद के खिलाफ थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।
स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने सवाल उठाया, “आखिर राजनीति में लोग साधु-संतों को ही अपना निशाना क्यों बनाते हैं? राजनीतिक फायदे के लिए संतों के भगवा वस्त्रों का अपमान करना कुछ लोगों की आदत बन गई है। रावण ने भी सीता हरण के लिए साधु का वेश बनाया था और उसका परिणाम उसके पूरे वंश के नाश के रूप में सामने आया। आज जो लोग संतों के स्वरूप का मजाक उड़ा रहे हैं, वे अपने राजनीतिक अंत को स्वयं आमंत्रित कर रहे हैं।”
इस राष्ट्रव्यापी अभियान को काशी विद्वत् परिषद ने भी अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। श्री काशी विद्वत् परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री अशोक तिवारी ने भी इस अभियान के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।

इस ऐतिहासिक बैठक में देश के कोने-कोने से अनेक संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उत्तराखंड से महामंडलेश्वर अरुण दास महाराज, जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंस देवाचार्य जी के उत्तराधिकारी, मध्य प्रदेश से महंत हनुमान दास, छत्तीसगढ़ से स्वामी राधेश्याम दास तथा उत्तर प्रदेश से स्वामी रामानंद तीर्थ जी प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इनके साथ ही गोवा के स्वामी हर्षिद्धानंद सरस्वती, पालघर में मिशनरियों को सीधी चुनौती देने वाले महाराष्ट्र के स्वामी भारतानंद, बिहार के स्वामी रणजीतेशानंद, ओडिशा के स्वामी सच्चिदानंद दास तथा बंगाल में सनातन अलख जगाने वाले ब्रह्मविद्यानंद सहित दक्षिण भारत के प्रतिनिधि भी इस महामंच का हिस्सा बने।
इससे पहले संत समिति की बैठक में आगामी 2 से 5 नवंबर तक संस्कृति संसद के आयोजन का निर्णय लिया गया। 2 नवंबर को राम मंदिर आंदोलन में वीरगति प्राप्त कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ इसका शुभारंभ होगा। राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद में देश भर से सभी परंपराओं के 3,000 से अधिक संत शामिल होंगे।