
प्रख्यात CPR विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने दिया वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण; प्रतिभागियों ने सीखे आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के गुर
वाराणसी, 01 अगस्त। स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं आपदा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी में जीवनरक्षक सी.पी.आर. (Cardiopulmonary Resuscitation) प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को हृदयाघात (Cardiac Arrest) जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने हेतु प्रशिक्षित करना था।
कार्यक्रम का शुभारम्भ कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एस. के. सिंह तथा कृषि संकाय के छात्र सलाहकार एवं नर्चरिंग लाइफ स्किल्स (NLS) सेल के समन्वयक प्रो. मनोज कुमार सिंह द्वारा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक राजकीय चिकित्सा अधिकारी, वाराणसी एवं प्रख्यात सी.पी.आर. विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने नवीनतम अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप Hands-on Practical CPR तथा Automated External Defibrillator (AED) के प्रभावी उपयोग का चरणबद्ध एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
अपने संबोधन में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि हृदयाघात के बाद के प्रारम्भिक कुछ मिनट किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि सही समय पर सही तकनीक से सी.पी.आर. दिया जाए, तो अनेक बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास कराते हुए आपातकालीन स्थिति में आत्मविश्वास एवं दक्षता के साथ कार्य करने की विधि सिखाई।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान संस्थान के शिक्षकों, विभागाध्यक्षों, अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, वैज्ञानिक, जनहितकारी एवं समय की आवश्यकता बताते हुए इसकी मुक्तकंठ से सराहना की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व अधिष्ठाता एवं पूर्व निदेशक, एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. यू. पी. सिंह द्वारा डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी को स्मृति-चिह्न, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके जनस्वास्थ्य जागरूकता एवं सी.पी.आर. प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान की सराहना की गई।
अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाज के प्रत्येक नागरिक से सी.पी.आर. जैसी जीवनरक्षक तकनीक सीखने तथा अधिकाधिक लोगों को इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय परिसर में स्वास्थ्य सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुई।
