
सोनभद्र ! वर्तमान शिक्षा प्रणाली क्रियात्मक व रचनात्मक पद्धति पर आधारित है इसकों ध्यान में रखते हुए स्वामी हरसेवानन्द पब्लिक स्कूल, चुर्क शाखा में पाँच दिवसीय ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ प्रबन्धक बाबा प्रकाशध्यानानन्द ने विद्यालय के प्रेरणास्रोत हरसेवानन्द जी महाराज के तैल चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन करके किया। इसमें विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास के लिए विभिन्न क्रिया-कलाप जैसे-खेल, मनोरंजन, योगा, ध्यान, प्राणायाम, नो फायर कुकिंग, नृत्य, कला, संगीत, समाचार संयोजन जैसे मनोरंजक विषयवस्तु को लेकर छात्रों के समूह को पाँच भागों में शिविर का आयोजन किया गया है।
जिसमें तन व मन से स्वस्थ एवं प्रसन्न चित्त रहने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे थे। शास्त्रीय एवं लोक संगीत तथा तबला एवं गिटार जैसे आधुनिक एवं परंपरागत वादनों का प्रशिक्षण कराया जा रहा है। वर्तमान समय में मीडिया की बढ़ती हुयी भूमिका को देखते हुए बच्चों को समाचार, संकलन, संयोजन एवं सम्पादन के गुण सिखाए जा रहे है। बिना आग का उपयोग में झटपट नाश्ता बनाने के लिए बहु उपयोगी है। इसमें मिक्सिंग, असेंबलिंग और कटिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके सलाद, चाट आदि बनाये। इसके अलावा कागज, घास-फूस, मिट्टी, कार्टून इत्यादि अनुपयोगी वस्तुओं से विरासत के उपयोगी सामान तैयार करने के तरीके सिखाकर न सिर्फ उनकी उपयोगिता बतायी जा रही है अपितु पुराने चीजों से नई चीजों के निर्माण को मनोरंजक तरीके से अभिव्यक्त कर उसमें सृजनात्मक हुनर सिखाया जा रहा है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ए०के०वर्मा ने अपने वक्त्वय में कहा कि “यह प्रशिक्षण शिविर एक विराम नहीं वल्कि यह हमारे अंन्दर आत्मविश्वास, साहस और प्रतिभा को निखारने का अनूठा माध्यम है। विद्यार्थियों एवं शिक्षको ने मेहनत और लगनशीलता की छाँव में अनुसासन में रह कर समय का सदुपयोग करते हुए उत्कर्ष से चरमोत्कर्ष तक पहुँचने की प्रेरणा दी।
ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर के शुभारम्भ अवसर पर सुधांशु मोदनवाल, आंचल, सुप्रीया मौर्या, अंकुश गुप्ता, निर्मला यादव, चंचला मिश्रा, आलोक तिवारी, अंकित शुक्ला, शशीराना, शिव प्रसाद, अंजना पाण्डेय, आदि शिक्षक मौजूद रहे तथा कार्यक्रम का संचालन फरहीन सिद्वीकी ने किया।