
आज सद्गुरु कबीर साहेब के 628 वे प्राकट्य महोत्सव पर त्रिदिवसीय महोत्सव और सत्संग का कार्यक्रम सद्गुरु कबीर प्राकट्यधाम लहरतारा तालाब एवं स्मारक विकास समिति द्वारा आयोजित किया गया। प्राकट्य महोत्सव के प्रथम दिन सर्वप्रथम सद्गुरु कबीर साहेब का मुख्य मंत्र सत्यनाम से अंकित ध्वजारोहण किया गया। उसके पश्चात् सद्गुरु कबीर साहेब के मूर्ति पर पुष्प अवं माला तथा चादर ओढ़ाकर आरती पूजा की गयी। इस विशाल कार्यक्रम का आयोजन नादवंशाचार्य पंथश्री हजूर अर्धनाम साहेब के पावन सान्निध्य में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संत श्री अनुपम साहेब के स्वागत भजन के साथ हुई। आज मोरे घर साहेब आये दर्शन करी दोऊ नैना जुड़ाये। .. सद्गुरु कबीर साहेब प्राकट्य प्रसंग पर आधारित भजनों से हुआ। महंत श्री राधेश्याम शास्त्री साहेब नवागांव धमतरी छत्तीसगढ़ ने सद्गुरु कबीर साहेब के प्रसिद्ध भजन नाम साहेब का जपले वंदे फिर पीछे पछतायेगा गाकर लोगो को मंत्रमुग्ध कर दिया। पटना बिहार से पधारे महंत श्री मनभंग दास शास्त्री साहेब ने अपने प्रवचन में कहा की पंथश्री हजूर उदितनाम साहेब ने सर्वप्रथम लहरतारा धाम में सद्गुरु कबीर साहेब के झंडे गाड़ा और सद्गुरु कबीर साहेब का मूल मंत्र सत्यनाम को जन -जन तक पहुंचाने का अथक प्रयास किये। सद्गुरु कबीर साहेब सत्य , अहिंसा , प्रेम , विश्वबंधुत्व और समता का अमर सन्देश मानव मात्र को दिया। आज पूरी दुनिया में सद्गुरु कबीर साहेब के संदेशों को याद किया जाता है। सत्संग रूपी गंगा में गोटा लगाकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। भक्ति का मार्ग को निगुरा व्यक्ति नहीं जान सकता। भागलपुर बिहार से महंत श्री सुनील दास शास्त्री साहेब जी ने कबीर प्राकट्य महोत्सव पर अपने विचार रखते हुआ कहा की आज से 628 वर्ष पूर्व सद्गुरु कबीर साहेब इस धरा धाम पर आये उस समय सनातन धर्म पर सबसे ज्यादा कुठाराघात किया गया। गरीब साहेब की वाणी है गगन मंडल से उतरे सद्गुरु सत्य कबीर , जलज मांहि पौढ़न किये दोउ दिनन के पीर। सद्गुरु कबीर साहेब किसी माता पिता के गर्भ से नहीं आये वे एक प्रकाश स्वरूप ज्योति के रूप में कमल पुष्प पर अवतरित हुए जिसका दर्शन सर्व प्रथम स्वामी रामानंद जी शिष्य स्वामी अष्टानंद जी किया। ज्येष्ठ पूर्णिमा सोमवार के दिन सद्गुरु कबीर साहेब का प्राकट्य हुआ था। पूज्य श्री धर्माधिकारी सुधाकर दस जी शास्त्री साहेब ने अपने प्रवचन में कहा की सद्गुरु कबीर साहेब का सिद्धांत अपने आप में सबसे अलग है। व्यवहार और परमार्थ दोनों को सुधारना जरुरी है। सद्गुरु कबीर साहेब एक अप्रतिम महापुरुष थे। स्वयं जो सत्य है जिसे सत्य की गान स्तुति सत्यपुरुष स्वयं करते हैं। सद्गुरु और सत्यपुरुष में कोई भेद नहीं है। ज्येष्ठ मास की गर्मी से पीड़ित मनुष्य और तीनो ताप दैहिक , दैविक और भौतिक को मिटाने के लिए ही सद्गुरु का इस पृथ्वी लोक में आना हुआ। सद्गुरु कबीर प्राकट्य धाम लहरतारा तालाब अवं स्मारक विकास समिति के पीठाधीश्वर नादवंशाचार्य पंथश्री हजूर अर्धनाम साहेब ने सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव के शुभ अवसर पर अपने आशीर्वचन में कहाकि काशी शहर जलज बिच डेरा “काशी शहर में कमल के भीतर (लहरतारा तालाब में) डेरा है, जहाँ कबीर साहेब पाए गए, अब हम अविगति से चले आये मेरा भेद मरम नहि पाए। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर साहेब लहरतारा तालाब में प्रकट हुए जीवन को समझने तथा जीवन क्या है जिससे समझ सकने की दृष्टि आयी यह सद्गुरु कबीर साहेब चरणों में श्रद्धा सुमन करते हैं। इस मिटटी रूपी शरीर को पावन पवित्र कर दिया , सद्गुरु के उपकार से जीवन धन्य हुआ। ज्ञान और अज्ञान के बंधन जीव बहार से बांध देता है और आपके अंदर ज्ञान रूपी ताकत है तो उसे कोई बंधन बांध नहीं सकता। यह सद्गुरु कबीर साहेब अमर ज्ञान है। उनके प्राकट्य स्वरुप के उपकार को स्मरण कर लेना ही सच्ची भक्ति की पहचान है। जैसे चुम्बक लोहे को अपनी आकर्षित करता है और अपनी ओर खींचने के कोशिश करता है वैसे भक्ति भी जिव को अपनी और खींचती है और उसे भय से बाहर कर देती है। जिन खोजा तीन पाइया गहरी पानी पैठ , मैं बपुरी डूबन दरी रही किनारे बैठ , ऐसे ही भयभीत जिव की स्थिति है। डर से ही हम गहराई में उतर नहीं पाते और भय से मुक्ति नहीं मिलती। इसका हर सद्गुरु प्रेमी को अनुभव करना चाहिए। सद्गुरु की भक्ति सहज है। सहज सहज सब कोई कहै, सहज न चीन्है कोइ।जिन्ह सहजै विषिया तजी, सहज कही जै सोइ॥ अर्थात लोग ‘सहज’ (सरलता या सहज अवस्था) के बारे में सब बातें करते हैं, लेकिन असल में कोई इसके मर्म को नहीं समझता जो लोग स्वाभाविक रूप से सांसारिक विषयों (मोह-माया और विकारों) को त्याग देते हैं, असली सहजता वही कहलाती है。पूरा परिसर आज सद्गुरु कबीर साहेब वचनों , शब्द , साखी , भजन से गुंजायमान रहा। खंजरी पर बाहर से आये लोगो द्वारा सद्गुरु कबीर साहेब के भजन से मंत्र मुग्ध प्रतीत होता रहा। ऐसे लगा जैसे आज सद्गुरु कबीर साहेब सबके बीच बैठकर ज्ञान बाँट रहे हैं। इस अवसर पर बिहार ,बंगाल, उड़ीसा , उत्तर प्रदेश , गुजरात , दिल्ली , हरयाणा , पंजाब , राजस्थान , हिमाचल , आदि प्रदेशों से भक्त श्रद्धालु उपस्थित रहे। सद्गुरु कबीर लहरतारा धाम सेवा समिति के सभी सदस्यों ने सेवा की जिम्मेदारी को संभाला। साध्वी सूरज कंवर साहेब के पुण्य स्मृति में उनके वधु – सुपुत्र मंजू सत्य प्रकाश महामंदिर जोधपुर राजस्थान निवासी की ओर से भजन भंडारा का आयोजन सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव पर आये सभी संत महंत भक्त हंसजनों के लिए किया गया। इस अवसर पर कालूराम जी, सुरेश जी, सुधीर जी , भगवत सिंह जी , ज्ञान सत्यप्रकाश जी , केशव दास जी ,रोहित दास जी इत्यादि संस्था के सदस्य उपस्थित थे। इस तरह तीन दिन तक ऐसे ही सत्संग एवं भंडारा चलता रहेगा। कार्यक्रम का संचालन संत श्री संतोष दास और गौतम दास जी ने किया।