
जल, नींबू रस, छाछ से लेकर गन्ने के रस, तुलसी काढ़े और आम पन्ने तक—श्रद्धालुओं को मिली विविध निःशुल्क सेवाएँ
वाराणसी। श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के पावन अवसर पर मोक्ष सदन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, वाराणसी द्वारा लगातार तीन दिनों तक श्रद्धालु सेवा का विशेष अभियान संचालित किया गया। रथयात्रा मेले में देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं के लिए संस्था की ओर से विभिन्न प्रकार की निःशुल्क सेवाएँ उपलब्ध कराई गईं।
तीन दिनों के दौरान श्रद्धालुओं को शीतल पेयजल, नींबू रस, दही की छाछ, गन्ने का रस, तुलसी का काढ़ा एवं आम का पन्ना वितरित किया गया। भीषण गर्मी और मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच संस्था का सेवा अभियान श्रद्धा, सहयोग और समर्पण के साथ निरंतर चलता रहा।
प्रथम दिन: जल एवं नींबू रस सेवा से हुआ शुभारंभ
रथयात्रा मेले के प्रथम दिन मोक्ष सदन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क शीतल पेयजल एवं नींबू रस का वितरण किया गया।
इस सेवा कार्य में दुर्गा जी मंदिर के महंत पंडित विकास दुबे जी का प्रमुख सहयोग प्राप्त हुआ। इसके साथ ही श्रीमती पी. सत्यवती जी, हैदराबाद सहित अनेक श्रद्धालुओं एवं दानदाताओं ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सहयोग प्रदान किया। सामूहिक सहयोग और श्री जगन्नाथ जी की कृपा से प्रथम दिन का सेवा कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
द्वितीय दिन: नींबू जल, छाछ एवं शीतल पेयजल सेवा जारी रथयात्रा मेले के दूसरे दिन भी संस्था की श्रद्धालु सेवा निरंतर जारी रही। श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क नींबू जल, दही की छाछ एवं शीतल पेयजल का वितरण किया गया। द्वितीय दिवस के सेवा कार्य में रामताड़का आंध्रा आश्रम के अध्यक्ष श्री सुंदरम शास्त्री जी का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। अनेक श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों ने भी सेवा कार्य में सहभागिता की।
तृतीय दिन: विविध शीतल एवं स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थों से श्रद्धालुओं की सेवा रथयात्रा महोत्सव के तीसरे दिन सेवा अभियान को और व्यापक रूप देते हुए श्रद्धालुओं के लिए गन्ने का रस, तुलसी का काढ़ा, आम का पन्ना एवं शीतल पेयजल की निःशुल्क सेवा उपलब्ध कराई गई। श्रद्धालुओं को नींबू रस एवं छाछ का भी वितरण किया गया। गर्मी के बीच गन्ने का रस, आम का पन्ना और शीतल पेयजल श्रद्धालुओं के लिए विशेष राहत का माध्यम बने, वहीं तुलसी का काढ़ा श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में उपलब्ध कराया गया। तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सेवा का लाभ प्राप्त किया और सेवा अभियान श्रद्धा एवं जनसहयोग के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
जनसहयोग बना सेवा अभियान की सबसे बड़ी शक्ति
तीनों दिनों के इस सेवा अभियान की विशेषता यह रही कि यह किसी एक व्यक्ति या संस्था का प्रयास नहीं, बल्कि समाज के अनेक श्रद्धालुओं, दानदाताओं, समाजसेवियों एवं सहयोगियों की सामूहिक सहभागिता का परिणाम था।किसी ने जल सेवा में सहयोग दिया, किसी ने नींबू रस, छाछ, गन्ने के रस, आम पन्ना या अन्य सेवा में योगदान दिया। अनेक सहयोगियों ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस जनसेवा अभियान को सफल बनाने में सहभागिता की।
मोक्ष सदन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्षा श्रीमती उषा रानी ने तीनों दिनों के सेवा अभियान में सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों, दानदाताओं, श्रद्धालुओं एवं स्वयंसेवकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सेवा कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज के भीतर सहयोग, संवेदना और सहभागिता की भावना को मजबूत करना है। श्री जगन्नाथ जी की कृपा और समाज के सहयोग से तीन दिनों तक चला यह सेवा अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने कहा…
“हम सेवा का अवसर चाहते हैं, श्रेय का नहीं; क्योंकि जहाँ श्री जगन्नाथ जी की कृपा होती है, वहाँ सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान है।”मोक्ष सदन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट ने विशेष रूप से दुर्गा जी मंदिर के महंत पंडित विकास दुबे जी, रामताड़का आंध्रा आश्रम के अध्यक्ष श्री सुंदरम शास्त्री जी, श्रीमती पी. सत्यवती जी, हैदराबाद सहित सभी सहयोगियों एवं दानदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। की तीन दिनों तक चली यह सेवा केवल पेय पदार्थों के वितरण तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह काशी की सेवा-परंपरा, समाज की सहभागिता और श्री जगन्नाथ जी के प्रति श्रद्धा का सामूहिक स्वरूप थी।
काशी में सेवा कोई आयोजन नहीं—एक परंपरा है।
और जब सेवा श्रद्धा से जुड़ती है, तो वह स्वयं साधना बन जाती है।
“सेवा से संस्कार • संस्कार से समाज • समाज से राष्ट्र”