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बांग्ला भाषा एवं साहित्य में रोजगार की अपार संभावनाएँ : डॉ. स्वप्ना बंद्योपाध्याय

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बांग्ला भाषा एवं साहित्य में रोजगार की अपार संभावनाएँ : डॉ. स्वप्ना बंद्योपाध्याय
महिला महाविद्यालय में बांग्ला साहित्य में रोजगार के अवसरों पर विशेष व्याख्यान आयोजित
वाराणसी, 26 अक्टूबर। आज महिला महाविद्यालय के प्रांगण में महाविद्यालय के प्लेसमेंट सेल के तत्वावधान में बांग्ला विभाग की ओर से ‘बांग्ला साहित्य में रोजगार के अवसर’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आर्य महिला पी.जी. कॉलेज, वाराणसी के बांग्ला विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वप्ना बंद्योपाध्याय थीं।
अपने व्याख्यान में डॉ. बंद्योपाध्याय ने ‘21वीं शताब्दी में बांग्ला भाषा एवं साहित्य : रोजगार की संभावनाएँ और नए आयाम’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बांग्ला भाषा एवं साहित्य का अध्ययन केवल शिक्षण और शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुवाद, पत्रकारिता, प्रकाशन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट राइटिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
उन्होंने छात्राओं को भाषा संबंधी कौशल विकसित करने, आधुनिक तकनीक से जुड़ने तथा नए व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उनका व्याख्यान छात्राओं के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहा।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अफजल, डॉ. मोनिका, प्रोफेसर सरिता रानी तथा प्रोफेसर सरस्वती कुमारी सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं छात्राएँ उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोमा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उत्तम गिरि ने किया। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।

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