
हिंदुस्तान के मरीजों को इलाज अमेरिका के किसी अस्पताल जैसा चाहिए। इलाज के दौरान दुर्भाग्यवश कुछ घटित हो जाए तो तोड़-फोड़ ऐसे करेंगे कि मानो अस्पताल सीरिया का है। कोर्ट में जज साहब अस्पताल पर जुर्माना ऐसे लगाते हैं जैसे अस्पताल यूरोप में है, और इलाज का बिल मरीज ऐसे देना चाहता है जैसे अस्पताल सोमालिया का हो।
धन्य है मेरे देश की जनता। अपने पड़ोस के छोटे और सस्ते नर्सिंग होम्स को बंद करवाने पर तुली है, पर कॉरपोरेट का बिल देखकर रोना आ जाता है। चाहते क्या हो भाई?
70 साल में आपकी सरकारें आपको किसी बड़े कॉरपोरेट अस्पताल जैसा एक भी अस्पताल नहीं दे पाईं। अपने बलबूते पर ये अस्पताल आपको विश्वस्तरीय उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ पश्चिमी देशों के मुकाबले कई गुना कम दामों पर उपलब्ध करवा रहे हैं, फिर भी आपकी शिकायतें हैं कि खत्म ही नहीं होतीं। और शिकायतें हैं भी तो हिम्मत है तो उन नेताओं और अधिकारियों से शिकायत करो, जिनकी रात-दिन चरण वंदना करते तुम नहीं थकते। काहे गरीब डॉक्टर्स को रात-दिन गरियाते हो?
याद रखो, जब भी तुम किसी डॉक्टर को पीटते हो या जब भी किसी छोटे अस्पताल में तोड़-फोड़ करते हो, तुम जाने-अनजाने इन्हीं कॉरपोरेट अस्पतालों के फलने-फूलने का मार्ग प्रशस्त करते हो। अंग्रेज़ी में कहते हैं, “You get what you deserve.”
तो मेरे प्यारे देशवासियो, आप खुद अपनी नियति के रचयिता हो। अगली बार जब किसी कॉरपोरेट अस्पताल का लंबा-चौड़ा बिल देखकर रोना आए, तो बजाय निरीह डॉक्टर्स को कोसने के एक सवाल खुद से भी पूछना। पूछना कि कहाँ खो गया मेरे पड़ोस का वह छोटा-सा अस्पताल, जो मेरे परिवार की 80-90 प्रतिशत बीमारियों का सस्ता इलाज कर देता था?
कहाँ गया मेरा वह फैमिली डॉक्टर, जिस पर मेरा पूरा परिवार आँख मूंदकर भरोसा करता था और जो रात के 2 बजे भी थोड़ी फीस लेकर मेरा इलाज कर देता था?
और फिर एक सवाल अपनी सरकार से भी पूछना। पूछना कि इतना टैक्स देने के बावजूद क्यों मुझे इलाज के लिए किसी कॉरपोरेट अस्पताल में जाना पड़ा? क्यों किसी सरकारी अस्पताल में मेरा विश्वस्तरीय इलाज नहीं हो पाया?