
वाराणसी, 15 जुलाई 2026
राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. सुरेश अवस्थी जी की 20वीं पुण्य स्मृति के अवसर पर डॉ. सुरेश अवस्थी स्मृति न्यास, वाराणसी द्वारा “AI : प्रभाव और दुष्प्रभाव” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन पूजा रेजिडेंसी (पासपोर्ट ऑफिस), महमूरगंज, वाराणसी में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के समाज, शिक्षा, प्रशासन, मीडिया तथा मानव जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री मनोज सिन्हा, उप राज्यपाल, जम्मू कश्मीर, ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज के समय की एक परिवर्तनकारी तकनीक है, जो सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि तथा विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों में नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि AI का उपयोग सदैव मानवीय मूल्यों, पारदर्शिता और नैतिकता के अनुरूप होना चाहिए।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता पद्म भूषण श्री रामबहादुर राय, वरिष्ठ पत्रकार एवं अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली, ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सामाजिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि AI ने सूचना और संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं, किंतु इसके बढ़ते प्रभाव के साथ नैतिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदनाओं की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, ने भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा व्यवस्था और अनुसंधान में AI की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक होगी जब वह भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़े।
रुचिर प्रो. लक्षित गुप्ता, आई.आई. आई.टी., काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तकनीकी पक्ष, अनुसंधान, नवाचार तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि AI विज्ञान, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रहा है तथा इसके जिम्मेदार उपयोग के लिए निरंतर शोध और कौशल विकास आवश्यक है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री रिजवान अहसान ने मीडिया और पत्रकारिता पर AI के प्रभाव, फेक न्यूज़, सूचना की विश्वसनीयता तथा डिजिटल नैतिकता जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता और तथ्यपरकता को बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, पत्रकारों, विद्यार्थियों एवं बुद्धिजीवियों ने भी विषय पर अपने विचार रखे तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों और चुनौतियों पर सार्थक विमर्श किया। सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि AI का विकास मानव कल्याण, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों के संरक्षण के साथ होना चाहिए।
संगोष्ठी का आयोजन में प्रमुख आयोजक की भूमिका में प्रो. विक्रमादित्य राय, प्रो. बेचन लाल, राम गोपाल मोहले और सुधीर मिश्रा द्वारा सुरेश अवस्थी स्मृति न्यास, वाराणसी द्वारा सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. सुरेश अवस्थी जी के राष्ट्रवादी चिंतन एवं बौद्धिक योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन के साथ हुआ।