
यूरिया के अति-उपयोग पर रोक और जैव-उर्वरक अपनाने पर जोर
राजातालाब
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने “खेत बचाओ अभियान” के तहत आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र के कादीचक में किसान जागरूकता कार्यक्रम किया।कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने बताया कि मिट्टी जीवित तंत्र है। अत्यधिक यूरिया से मिट्टी और भूजल दोनों संकट में हैं। केंचुए खेत के जैविक संकेतक हैं। किसानों को फसल विविधीकरण, संतुलित उर्वरक प्रयोग और मृदा परीक्षण अपनाने की सलाह दी गई।राजेश कुमार ने मृदा स्वास्थ्य और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने पर बल दिया। नीरज सिंह ने लाभकारी सूक्ष्मजीवों और आईआईवीआर द्वारा विकसित जैव-उर्वरकों से लागत घटाने की जानकारी दी। एस के सिंह ने मृदा परीक्षण और जैव-उर्वरक उपयोग की विधि दिखाई। राकेश कुमार दुबे और नवीन सिंह ने हरी खाद के फायदे समझाए।किसानों को ‘काशी एज़ोबीसी-पी’, ‘काशी एज़ोबीसी-एल’ और ‘काशी बायोडर्मा’ जैव-उर्वरक वितरित किए गए। संतुलित पोषण, जैव-उर्वरक और मृदा नमूना विधि पर लीफलेट भी दिए गए।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान अशोक कुमार सहित 158 किसान शामिल हुए, जिनमें 70 महिलाएं थीं। किसानों ने तकनीकी जानकारी में रुचि दिखाई और मृदा संरक्षण की उन्नत तकनीक अपनाने का संकल्प लिया।