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गविष्ठौ (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध) — कानपुर में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का उद्घोष —

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‘भगवान राम के रघुवंश को सब कुछ गौ सेवा से मिला’
लाखों’ लोग मिले, एक भी नहीं मिला जो कहे गौ माता नहीं—फिर भी सरकार गौ को पशु कहती है

​जिला: कानपुर, उत्तर प्रदेश |
मूल मंत्र: “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”

​”हम इस यात्रा में 100 से अधिक विधानसभाओं में लाखों लोगों से बात कर चुके हैं। हर जगह एक ही सवाल पूछा: गौ माता है या पशु? एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जिसने कहा हो कि गौ माता नहीं है। सब ने माता कहा। और उन्हीं लोगों के वोट से बनी सरकार गौ को पशु कहती है। यह कैसे संभव है?”​—परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’

​कानपुर। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गोप्रतिष्ठा (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ ने कानपुर जिले में जनसभाओं को संबोधित किया। उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
​’गौ दूध देने की मशीन नहीं — वह आशीर्वाद का अक्षय भंडार है’
​महाराजश्री ने भारतीय दृष्टि और विदेशी दृष्टि का अंतर स्पष्ट किया: जैसे सच्चा हिंदू गुरु महाराज को केवल मनुष्य नहीं मानता — ‘गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु…’ बोलकर साक्षात् परब्रह्म मानता है — उसी तरह सच्चा हिंदू गौ को देखकर दूध देने की मशीन नहीं सोचता। “जब दूध मिला तो सेवा, दूध बंद हुआ तो छोड़ दिया — यह विदेशियों की मानसिकता है। गौ जीवन के हर चरण में आशीर्वाद देती है। जिन्होंने गौ माता की सेवा की, उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में — धन, विद्या, मान, परिवार — सब में आशीर्वाद मिला।”
​’रघुवंश — भगवान राम के कुल को सब कुछ गौ सेवा से मिला’
​महाराजश्री ने पवित्र परंपरा उद्धृत की: जिस वंश में भगवान श्री राम ने जन्म लिया उसे रघुवंश — रघुनंदन — रघुकुल कहा जाता है। उस महान वंश को प्राप्त संपूर्ण सम्मान, समृद्धि, विद्या और दैवीय कोप — सब गौ सेवा के माध्यम से प्राप्त हुई। “रोटी, कपड़ा और मकान — हमारी सभ्यता ने जो कुछ भी बनाया, पीढ़ी दर पीढ़ी जो भी मिला — सब गौ से मिला। गौ उपयोगिता नहीं है — गौ सर्वस्व है।”
​’लाखों लोगों में एक भी नहीं मिला जो कहे गौ माता नहीं’
​महाराजश्री ने 100 से अधिक विधानसभाओं में लाखों लोगों से संवाद का निष्कर्ष साझा किया: “जहाँ भी गए, यही पूछा: गौ माता है या पशु? एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जिसने कहा हो कि माता नहीं है। सबने एक स्वर से कहा: माता। और उन्हीं के वोट से बनी सरकार गौ को पशु कहती है। क्या एक हांडी में दूध और खून साथ रह सकते हैं? दो विरोधाभासी स्थितियां एक साथ नहीं चल सकतीं। यह विरोधाभास मतदान में हल होगा।”
​’मेरे दरवाजे स्वर्ग का एक ही द्वार है — गौ को माता घोषित करें, गौ हत्या बंद करें’
​महाराजश्री ने स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया: “हम किसी सरकार से कोई गैर-कानूनी बात नहीं माँग रहे। संविधान का अनुच्छेद 48 पहले से ही गौ रक्षा का प्रावधान करता है। हम केवल यह माँग रहे हैं कि जो लिखा है उसका पालन करें। जिस पार्टी या प्रत्याशी को हमारा वोट चाहिए — वह अपने स्तर पर गौ को माता घोषित करके, गौ हत्या बंद करने का ठोस कदम उठाकर हमारे दरवाजे आए। यह दरवाजा सबके लिए खुला है — लेकिन केवल इस एक शर्त पर।”

​कानपुर की सभा में श्री मनोज कुमार — जो पिछले दो वर्षों से हनुमान सेवा संगठन के साथ सक्रिय सामाजिक कार्यों में लगे हैं — आगे आए और उन्हें बिठूर विधानसभा में एक नोट अभियान एवं गौधाम निर्माण के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। वे पूरी विधानसभा के हर गाँव में एक टीम बनाएंगे, हर घर में जाएंगे, प्रत्येक निवासी से ₹1 से ₹500 का एक नोट एकत्र करेंगे, पूरा हिसाब रखेंगे और उस राशि से गौधाम बनाएंगे — जहाँ गौ माता आशीर्वाद देने के लिए विराजमान होंगी।
​सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा
​महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई:
​”मैं घोषणा करता/करती हूँ कि गौ मेरी माता है। मेरी गौ माता को जो पशु कहेगा — चाहे कोई पार्टी हो, चाहे कोई नेता — आज से उससे मेरा संबंध टूटा। आने वाले चुनाव में उस पार्टी को वोट दूँगा जो गौ को माता घोषित करके और गौ हत्या बंद करके हमारे दरवाजे आए।”
​तत्पश्चात चक्रधारी मुद्रा में — दाहिना हाथ उठाकर पहली उंगली ऊँची करके — वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया।
​24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प
​3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गोप्रतिष्ठा यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी है।

संजय पाण्डेय/मीडिया प्रभारी।

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