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कल्पवृक्ष के नीचे पूज्य स्वामी सद्गुरू सरना नंद जी महाराज का दिव्य प्रवचन: कलियुग में सत्संग ही वास्तविक कल्पवृक्ष

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गढ़वा घाट, वाराणसी। संत मत अनुयायी आश्रम मठ, गढ़वा घाट में आश्रम परिसर स्थित पावन कल्पवृक्ष के नीचे पीठाधीश्वर परम पूज्य श्री श्री 108 श्री स्वामी सद्‌गुरू सरना नंद जी महाराज परम हंस ने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों को आध्यात्मिक प्रवचन प्रदान किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण एवं साधक उपस्थित रहे तथा गुरु वचनों का लाभ प्राप्त किया।

अपने उद्बोधन में स्वामी जी महाराज ने कल्पवृक्ष के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में कल्पवृक्ष को इच्छाओं की पूर्ति करने वाला दिव्य वृक्ष माना गया है। किंतु इसका वास्तविक अर्थ केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, ज्ञान, भक्ति और परम कल्याण की प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कल्पवृक्ष अपनी छाया में आने वाले सभी प्राणियों को समान रूप से आश्रय देता है, उसी प्रकार सद्‌गुरु और सत्संग मानव जीवन को शांति, स‌द्बुद्धि तथा मुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं।

स्वामी जी महाराज ने कहा कि वर्तमान कलियुग में मनुष्य भौतिकता, स्वार्थ, तनाव और अशांति के जाल में फंसता जा रहा है। ऐसे समय में सत्संग ही वह दिव्य साधन है जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि सत्संग आत्मा का भोजन है और सद्‌गुरु के वचन जीवन के अंधकार को दूर करने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। कलियुग में नाम-स्मरण, सत्संग और सद्‌गुरु की कृपा के बिना जीवन में स्थायी सुख और शांति की प्राप्ति संभव नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है, जबकि वास्तविक आनंद उसके भीतर ही विद्यमान है। सत्संग मनुष्य को स्वयं से जोड़ता है, उसके मन को निर्मल बनाता है तथा प्रेम, करुणा, सेवा और सदाचार जैसे गुणों का विकास करता है। जिस प्रकार कल्पवृक्ष की छाया में बैठकर शीतलता का अनुभव होता है, उसी प्रकार संतों के सान्निध्य और सत्संग में बैठकर मन को शांति और आत्मा को तृप्ति प्राप्त होती है।

स्वामी जी महाराज ने सभी अनुयायियों से नियमित सत्संग में सम्मिलित होने, सद्‌गुरु के उपदेशों को जीवन में उतारने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के प्रसार हेतु कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कलियुग में सत्संग ही वास्तविक कल्पवृक्ष है, जो मनुष्य की आध्यात्मिक पिपासा को शांत कर उसे परमात्मा की ओर अग्रसर करता है।

प्रवचन के उपरांत श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। भजन-कीर्तन एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। आश्रम परिसर पूरे समय भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के वातावरण से ओत-प्रोत रहा।

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