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आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय डोमरी, रामनगर, वाराणसी में “अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस” के उपलक्ष में ऑनलाइन वेबीनार का आयोजन।

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सर्वप्रथम वेबीनार की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम नरेश शर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर लाखों प्रजाति के जीव व वनस्पति उपलब्ध हैं। इन सबकी विशेषता व आवास भिन्न (विविध) हैं, फिर भी यह आपस मे प्राकृतिक कड़ियों से जुड़े हैं। संक्षेप में हम इसे वैश्विक जैव विविधता मान सकते हैं। मानव के कारण पर्यावरण में हो रहे बदलाव के कारण इनकी कड़ियाँ टूट रही हैं, जो कि चिन्ता का विषय है।

इस अवसर पर सुश्री अनामिका तिवारी ने बताया कि हर वर्ष 22 मई को “अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Day for Biological Diversity)” मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को जैव विविधता यानी पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक करना है।

डॉ. प्रतिमा राय ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने जैव विविधता के संरक्षण और इसके महत्व के प्रति दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस दिवस की शुरुआत की थी। इसके उद्देश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पौधों और जानवरों की प्रजातियों में घटती विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के नुकसान को रोकना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

मुकेश गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (22 मई) की इस वर्ष की थीम “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना” (Acting locally for global impact) है। इस विषय का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों और आम लोगों द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयासों को वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों से जोड़ना है।

अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन वेबीनार के संयोजक डॉ. सूर्य प्रकाश वर्मा ने किया।

वेबीनार में महाविद्यालय के शिक्षक–शिक्षिकाओं के साथ ही छात्राएं भी सम्मिलित हुईं।

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