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परंपरा और संस्कृति का ज्ञान कराते हैं त्योहार : प्रकाशध्यानानंद

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रंगोली एवं दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से स्वामी हर सेवा नन्द पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने

जाना दीपावली का सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व

वाराणसी। त्योहार हमारी भारतीय संस्कृति, सभ्यता और समृद्ध परंपराओं के संवाहक होते हैं। ये केवल हर्षोल्लास एवं उत्सव मनाने के अवसर नहीं, बल्कि नई पीढी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, जीवन मूल्यों और नैतिक आदर्शों से परिचित कराने का सवाकल माध्यम भी हैं। इसी आवभूमि पर आज स्वामी हर सेवा नन्द पब्लिक स्कूल, बनपुरवा, रमना, वाराणसी के परिसर में दीपावली पर्व के उपलक्ष्य में विविध सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर वि‌द्यालय के वि‌द्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए परिसर में आकर्षक एवं मनमोहक रंगोलियों सजाई तथा दीप प्रज्ज्वलित कर प्रकाश पर्व का उल्लासपूर्ण बातावरण निर्मित किया। रंग-बिरंगे रंगों से सुसज्जित रंगोलियों और दीपी की स्वर्णिम आमा ने परिसर को उत्सवमय बना दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को दीपावली की सात्विकता, पौराणिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक महत्ता तथा भारतीय संस्कृति में उसके विशिष्ट स्थान से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान वि‌द्यालय के प्रबंधक श्री प्रकाश ध्यानानंद जी ने वि‌द्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, दीपावली केवल डीपी का पर्व नहीं, अपितु अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य तथा निराशा पर आशा की विजय का शाश्वत संदेश है। यह पर्व हमे अपने अंतर्मन में सद्भाव, करुणा, प्रेम, परोपकार एवं सकारात्मक चिंतन का दीप प्रज्ज्वलित करने की प्रेरणा देता है।”

प्रधानाचार्य डॉ अजय कुमार चौबे ने कहा कि भारतीय पर्व एवं त्योहार हमारी सांस्कृतिक चेतना के आधार स्तंभ हैं। इनके माध्यम से हमारी भावी पीढ़ी अपनी परंपराओं, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों को आत्मसात करती है। अतः त्योहारी को केवल बाह्य आएंबर तक सीमित न रखकर उनकी मूल भावना एवं सात्विक स्वरूप को समझाना आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए उन्होंने विद्‌यार्थियों से आग्रह किया कि दीपावली को प्रदूषणमुक्त एवं पर्यावरण के अनुकूल ढंग से मनाएँ। अनावश्यक आतिशबाजी से बचे, मिट्टी के दीपों को प्रोत्साहित करें तथा ध्वनि एवं वायु प्रदूषण के प्रति सजग रहै। साथ ही जरूरतमंदों के साथ खुशियों बाँटकर पर्व की वास्तविक सार्थकता को साकार करें।

विद्‌यालय का यह आयोजन वि‌द्यार्थियों में रचनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना, सामूहिक सहभागिता एवं पर्यावरणीय कार्यक्रम में संवेदनशीलता विकसित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक ज्योति तभी अक्षुण्ण रहेगी, जब नई पीढ़ी अपनी परंपराओं के गौरव को समझाते हुए उन्हें जीवन में आत्मसात करेगी।

कार्यक्रम में सभी शिक्षक और बच्चों ने भाग लिया

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