
राजघाट खुदाई में मिले मानव कंकाल पर बीएचयू में आनुवंशिक अध्ययन शुरू।
राजघाट उत्खनन 1957-1969 के दौरान प्रो ए.के. नारायण डॉ तो. एन. राय द्वारा किया गया था। यहाँ से प्राप्त मानव कंकाल का अभी तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ था। आनुवंशिक विज्ञानी प्रो ज्ञानेश्वर चौबे और आज एनशिएन्ट डीएनए विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ज्वल प्रताप सिंह ने कंकाल से सावधानीपूर्वक नमूने एकत्र किए। विभागाध्यक्ष प्रो महेश प्रसाद अहिरवार ने बताया कि राजघाट काशी की प्राचीनता और निरंतरता का महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इस कंकाल को सुरक्षित रखना हमारे विभाग की जिम्मेदारी थी। अब आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि गंगा घाटी में रहने वाले प्राचीन लोग कौन थे, उनकी जीवनशैली कैसी थी और उनकी आनुवंशिक पहचान क्या थी। उन्होंने कहा कि विभाग के ‘शताब्दी वर्ष’ में ‘ज्ञान लैब’ के साथ यह सहयोग पुरातत्व और विज्ञान के बीच की दूरी को कम करने का सार्थक कदम है।”
