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चातुर्मास महाव्रत के षष्ठम दिवस पर पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने धर्म के महत्व पर डाला प्रकाश

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अनंत श्रीविभूषित काशीधर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री काशीधर्म पीठ रामेश्वर मठ, अस्सी, वाराणसी में चल रहे चातुर्मास महाव्रत महोत्सव के षष्ठम दिवस का सत्संग श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव के श्रीमुख से धर्मोपदेश का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
अपने दिव्य प्रवचन में पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन तथा उसके समस्त संबंधों में धर्म का होना अत्यंत आवश्यक है। धर्म ही परिवार, समाज और राष्ट्र को मर्यादा, प्रेम, करुणा तथा कर्तव्यबोध के सूत्र में बाँधता है। धर्म के अभाव में संबंध केवल स्वार्थ तक सीमित रह जाते हैं, जबकि धर्मयुक्त संबंध विश्वास, त्याग, सेवा और सद्भाव पर आधारित होते हैं।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य को अपने प्रत्येक संबंध का निर्वहन धर्मानुसार करना चाहिए। माता-पिता, गुरु, परिवार, समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना ही वास्तविक धर्म है। धर्म मनुष्य को सत्य, न्याय, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा उसके जीवन को सार्थक बनाता है।
चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातःकाल पादुका पूजन, पूज्य गुरुदेव के दर्शन, सत्संग तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण का आयोजन निरंतर जारी है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री काशीधर्म पीठ के व्यवस्थापक आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, आचार्य अनुज मिश्रा, प्रवक्ता एडवोकेट विनय तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे।

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