मार्निंग असेम्बली में गुजेंगे गीता के श्लोक : डॉ अजय कुमार पाण्डे

वाराणसी :- महामना संस्कार पुस्तकालय द्वारा शहर के 31 विद्यालयों में आयोजित गीताज्ञान प्रतियोगिता एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान प्रतियोगिता में के वी पब्लिक स्कूल कर्मनवीर सुसुवाही के 61 विद्यार्थियों ने मेधा-सूची में स्थान प्राप्त कर अपने विद्यालय का परचम लहराया है जिससे उत्साहित होकर प्रबंध निदेशक डॉ अजय कुमार पाण्डे ने सभी प्रतिभागियों एवं विजयी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए इसे विद्यालय का गौरव बताया|
महामना संस्कार पुस्तकालय के तत्वावधान में के वी पब्लिक स्कूल में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ पाण्डे ने महामना संस्कार पुस्तकालय के इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं चरित्र-निर्माण में उपयोगी कहा| भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्र-निर्माण के महानायक परम् पूज्य भारतरत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की त्याग-तपस्या, तेजस्वी-ओजस्वी व्यक्तित्व, महान कृतित्व, एवं विशेष रूप से विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण के प्रति उनकी तत्परता तथा गंभीरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने महामना के आदर्शों का अनुसरण करने और गीता पढ़ने के लिए प्रेरित किया| उन्होंने प्रतिदिन मॉर्निंग असेंबली में भगवद्गीता का एक श्लोक (अर्थसहित) पढ़ने हेतु प्रोत्साहित भी किया, जिससे विद्यार्थियों सहित संपूर्ण विद्यालय परिवार को कर्तव्यनिष्ठा एवं पवित्रता की प्रेरणा मिलेगी| बीएचयू से सेवानिवृत्त सहायक कुलसचिव एवं महामना संस्कार पुस्तकालय के अत्यंत समर्पित स्वयंसेवक डॉ नरेश चंद पाण्डे के करकमलों द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र के साथ पुरस्कार स्वरूप भगवद्गीता एवं महापुरुषों की प्रेरणादाई पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया गया| साथ ही अन्य सभी प्रतिभागियों को भी प्रमाण-पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया| इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इन प्रतियोगिताओं के मुख्य संयोजक चीफ फार्मासिस्ट ऑफिसर एवं गीताज्ञान शिक्षक श्री अखिलेश कुमार राय ने विद्यार्थियों सहित संपूर्ण विद्यालय परिवार को इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि जिस उमंग-जोश और श्रद्धापूर्वक आपके विद्यालय में यह प्रतियोगिता आयोजित हुई वह बेहद सराहनीय और उत्साहवर्धक है| पिछले सत्र में 31 विद्यालयों से 14000 बच्चों की सहभागिता परम पवित्र गीताज्ञान एवं हमसभी के कुलगुरु तथा प्रेरणाश्रोत महामना मालवीय जी के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रत्यक्ष प्रमाण है जिससे प्रेरित होकर चालू एकेडेमिक सत्र में जुलाई माह से 100 विद्यालयों में यह प्रतियोगिता आयोजित होने जा रही है ताकि अघिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके| एक भारत श्रेष्ठ भारत विकसित भारत के लक्ष्य को सिर्फ विद्वता द्वारा सिद्ध नहीं कर सकते, बल्कि उसके लिए हृदय की पवित्रता अत्यंत जरूरी है तभी ‘राष्ट्र सर्वोपरि का भाव’ दृढ़ हो सकता है जिसके लिए हमें परम पवित्र गीताज्ञान का अमृत पीना और पिलाना होगा| विद्यालयों में भिन्न-भिन्न प्रकार की लौकिक विद्या पढ़ाई जाती है, जिसकी उपयोगिता है| परन्तु हमारे भावी भारत के निर्माता ये बच्चे इस परम पवित्र राजविद्या (सब विद्याओं का राजा गीताज्ञान) से वंचित ना रहें, इसका भी ध्यान रखना हमसभी की नैतिक जिम्मेदारी है क्योंकि यह परम पवित्र विद्या हृदय को पवित्र कर सुंदर चरित्र-निर्माण की प्रेरणा देते हुए राष्ट्र-निर्माण के लिए सशक्त सुयोग्य और राष्ट्रभक्त नागरिकों का सृजन करती है| इसके बिना राष्ट्र के सुनहरे भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते, इसीलिए महामना मालवीय जी ने विद्यार्थियों को गीताज्ञानामृत रसपान कराने पर बहुत जोर दिया| श्री राय ने एक स्वरचित गीत “आओ बच्चों तुम्हें बताएं महिमा गीता ज्ञान की, शक्ति-भक्ति देने वाली वाणी है भगवान की| अध्याय-अठारह श्लोक सात सौ बातें हैं बड़े काम की, बुद्धि-विवेक जगाने वाली वाणी है भगवान की” गाकर सुनाया जिसमें सहभाग करते हुए भाव विभोर हो गए बच्चे |
महामना एवं गीताज्ञान की प्रेरणा से सराबोर वातावरण में सैकड़ो की संख्या में बच्चों ने भी गीता पढ़ने का संकल्प लेते हुए उद्घोष किया:-
“गीता पढ़ेंगे आगे बढ़ेंगे,
सफलता की चोटी पे, हम भी चढ़ेंगे” |
“एक श्लोक गीता का पढ़ेंगे रोज,
सहज मिले अमृत का डोज”|
“गीता का गीत गायेंगे हम,
विकसित भारत बनायेंगे हम” |
“हम भी बनेंगे महामना के रतन,
यही तो उन्हें सच्चा नमन” |
जिससे पुरा वातावरण गुंज उठा|
इस अवसर पर संपूर्ण विद्यालय परिवार का सक्रिय सहयोग एवं उत्साह प्रशंसनीय था|
