
वाराणसी | 7 अप्रैल, 2026
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, यमिनी इनोवेशन वेलनेस सेंटर और एस.आर.एस.एन.टी. (SRSNT) मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रभावशाली स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का सफल आयोजन किया गया। वाराणसी के करौंदी स्थित महामना नगर कॉलोनी (प्लॉट संख्या 6) में आयोजित इस कार्यक्रम में नागरिकों को बी.एम.आई. (BMI), बी.पी. और शारीरिक प्रकृति के आधार पर उनके स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी दी गई और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव का मार्ग बताया गया।
दवाओं से परेः स्वास्थ्य के तीन आधार स्तंभ
अपने मुख्य संबोधन में, बी.एच.यू. (BHU) आयुर्वेद संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. यमिनी भूषण त्रिपाठी ने महर्षि चरक के प्राचीन ज्ञान और आधुनिक बायोफिजिक्स (Biophysics) के बीच के सेतु को स्पष्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयुर्वेद में वर्णित तीन स्तंभ आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य केवल अनुशासन नहीं, बल्कि हमारे शरीर के ‘हार्डवेयर’ को बनाए रखने की जैविक आवश्यकताएं हैं।
प्रो. त्रिपाठी ने ब्रह्मचर्य की एक नई वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए इसे ‘ऊर्जा संरक्षण’ का आधार बताया। उन्होंने कहा, “दिनचर्या और ऋतुचर्या का पालन करने का अर्थ है अपनी आंतरिक जैविक घड़ी को बाहरी सौर चक्र (Solar Cycle) के साथ तालमेल बिठाना। इस संतुलन को बनाए रखकर हम अपने ऊतकों (Tissues) को इतना मजबूत बना सकते हैं कि वे बिना किसी बीमारी के 100 साल के स्वस्थ जीवन का समर्थन कर सकें।”
संगोष्ठी के मुख्य स्वास्थ्य सुझावः
ब्रह्ममुहूर्त की शक्ति (सुबह 4:30-5:00): इस समय जागना और प्राणायाम करना मन और शरीर में ‘आकाश और ‘वायु’ तत्व को शुद्ध करता है। यह हमारे नर्वस सिस्टम (SNS) को शांत करता है, जो आधुनिक तनाव और बाल असंतुलन को रोकने के लिए आवश्यक है।
मेटाबॉलिक ब्रिज (पाचन की अग्नि): जठराग्नि को बनाए रखने के लिए, दिन का सबसे भारी भोजन दोपहर 12:00 से 1:00 के बीच करना चाहिए, जब सूर्य की शक्ति (मैक्रो-अग्नि) अपने चरम पर होती है।
नींद और उपवास का विज्ञानः गहरी नींद और इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) शरीर की ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy) प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं, जो कोशिकाओं से कचरा साफ करती है और बुढ़ापे की गति को कम करती है।
गट और गैस जैसी माइक्रोबायोम और आंतों का स्वास्थ्यः सात्विक आहार और सही खान-पान का तरीका ‘लीकी गट ७समस्याओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
शिविर में आए लोगों की जांच के बाद उन्हें उनकी प्रकृति के अनुसार 18 प्रकार के ‘विरुद्ध आहार’ से बचने की सलाह दी गई। इस अवसर पर शरीर की शुद्धि के लिए पंचकर्म और नेचुरोपैथी के महत्व को भी समझाया गया।
कार्यक्रम में अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए:
प्रो. एस.एन. ओझा (सेवानिवृत्त उप-प्राचार्य, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, हंडिया) ने एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
डॉ. राम वर्मा (माता आनंदमयी अस्पताल) और श्री एन. के. गुलाटी (योग विशेषज्ञ) ने शारीरिक व्यायाम और मानसिक संतुलन के समन्वय पर जोर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन, स्वागत और आयोजन श्री रसिक मोहन पांडेय जी द्वारा किया गया।

