Nandi News

103 वाँ संकटमोचन संगीत समारोह 6 से 11 अप्रैल तक।

Share on Social Media


धर्म,आध्यात्म एवं संगीत की नगरी काशी में एक बार फिर संकटमोचन संगीत समारोह कार्यक्रम का होना सुनिश्चित किया गया है। यह कार्यक्रम संकटमोचन मंदिर के प्रांगण में हनुमानजी महाराज को समर्पित होगा।
कुल 6 दिन तक आयोजित होने वाले इस संगीत के महाकुंभ में लगभग 140 से अधिक संगीत के विद्वान अपनी प्रस्तुति देंगे। जिनमे से 11 पद्म पुरस्कारों से सम्मानित हैं।
तुलसीघाट पर आयोजित पत्रकार वार्ता में संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो.विश्वम्भर नाथ मिश्र जी ने बताया कि 14 मुस्लिम कलाकार भी इस कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुतियों से बाबा संकटमोचन को रिझाने का प्रयास करेंगे। एक प्रश्न के उत्तर में महंतजी ने कहा कि संगीत को धर्म एवं मजहब की बेड़ियों में बांध कर नहीं रखा जा सकता। बाबा संकटमोचन के दरबार में सभी का स्वागत है।

उन्होंने आगे बताया कि 21 कलाकार पहली बार इस कार्यक्रम में आ रहे हैं। शाम की आरती के पश्चात 7:30 बजे से शुरुआत के बाद सम्पूर्ण रात्रि तक अनवरत संगीत का कार्यक्रम चलता रहेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ नृत्य नाटिका ‘चित्रकूट’ के मंचन से किया जाएगा जिसे निर्देशित करेंगे प्रसिद्ध रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल।
इस 6 दिवसीय संगीत समारोह का आग़ाज़ दरअसल 2 से 5 अप्रैल को संकटमोचन बाबा की जयंती पर रामायण सम्मेलन से ही हो जाएगा जिसमे काशी के अलावा अन्य नगरों से मानस मर्मज्ञ एवं रामायण मंडलियाँ अपनी उपस्थिति से आयोजन को चार चांद लगाने की भरसक कोशिश करेंगी। आयोजन के सभापति के रूप में अखिलब्रह्माण्ड नायक श्री सीताराम जी आसान पर विराजमान रहेंगें।
2 अप्रैल को श्री हनुमानजी जयन्ती के अवसर पर विशेष शृंगार, झांकी, आरती एवं पूजन एवं 3 से 5 अप्रैल त्रिदिवसीय सार्व भौम श्री रामायण सम्मलेन होगा।

6 दिवसीय संकटमोचन संगीत समारोह की रूपरेखा इस प्रकार है।

6 अप्रैल को रूपवाड़ी संस्था द्वारा नृत्य नाटिका, पंडित राहुल शर्मा का सन्तूर वादन,विधालाल द्वारा कत्थक नृत्य,एस आकाश- यदनेश रायकर द्वारा बांसुरी एवं वायलिन की प्रस्तुति।मालिनी अवस्थी जी द्वारा गायन,राहुल मिश्र द्वारा तबला,पंडित हरविंदर शर्मा का सितार एवं शिखा भट्टाचार्य द्वारा कत्थक।


सात अप्रैल-पं. यू राजेश एवं पं.शिवमणि द्वारा मैंडोलिन तथा ड्रम,पं. विश्वमोहन भट्ट – सलिल भट्ट (मोहनवीणा-सात्विक वीणा), जरगाम अकरण पं. शिवमणि। खां, खुर्रम अली नियाजी (तबला युगलबंदी), उस्ताद गुल्लाम अब्बास खां (गायन), पं. शुभ महाराज (तबला सोलो), पं. कुशल दास का सितार वादन ।

आठ अप्रैल – पं. उल्लाहस कसालकर-ओजस प्रताप सिंह (गायन), पं. विवेक सोनार (बांसुरी), विदुषी जसपिंदर नरूला जसपिन्दर नरूला। (गायन), विदुषी कौशिकी चक्रवर्ती (गायन), पं. देवाशीष भट्टाचार्या (गिटार), पं. महेश काले (गायन), पं. आलोक लाहिड़ी-अभिषेक लाहिड़ी (सरोद वादन)

नौ अप्रैल– पं. देवज्योति बोस (सरोद), कृतिया नरसिंह राणा (ओडिसी), पं. यू राजेश-राजेश वैद्य का मैंडोलिन एवं सरस्वती वीणा, पंडित अनूप जलोटा का गायन, सतीश ब्यास (संतूर), पं. अजय पोहनकर (गायन), पं. जयतीर्थ मेउंडी, (गायन)।

10 अप्रैल – पं. राममोहन महाराज (कथक), पं. तेजेंद्र नारायण मजूमदार (सरोद), पं. रोनू मजूमदार (बांसुरी), विदुषी कंकना बनर्जी (गायन), उस्ताद मसकूर अली खां (गायन), अमरेंद्र मिश्र (सितार), अनिरुद्ध भट्टाचार्या (गायन), अभिषेक (मकरंद वीणा)।\


11 अप्रैल– पं. रतिकांत महापात्रा- विदुषी सुजाता महापात्रा (ओडिसी), मेहताब अली नियाजी (सितार), विदुषी कलापिनी कोमकली (गायन), शिराज अली खां (सरोद), , पं. हरीश तिवारी (गायन), उस्ताद शाकिर खां (सितार), पं. साजन मिश्र स्वरांश मिश्र (गायन) ।


Leave a Comment