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फिर एक वर्दी बनी मिसाल I

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डरी हुई आंखें, बेचैन परिवार और फिर खुशियों का मिलन — मातलदेई पुलिस का सराहनीय कार्य
मातलदेई चौराहा पर आज इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने वहां मौजूद हर शख्स का दिल छू लिया। एक 9 वर्षीय मासूम बच्चा, जो घर से किसी बात पर नाराज़ होकर निकल गया था, भटकते-भटकते अकेलेपन और डर के बीच मातलदेई चौराहे तक पहुंच गया।
राजवीर यादव पुत्र छांगुर यादव, निवासी ग्राम सरैया सिकंदरपुर, थाना चुनार, जनपद मिर्जापुर, मासूम उम्र में अनजाने रास्तों पर अकेला खड़ा था। चेहरे पर डर, आंखों में बेचैनी और अपनों से बिछड़ने का दर्द साफ झलक रहा था। आसपास मौजूद लोगों ने जब बच्चे को इस हालत में देखा तो उनका मन भी विचलित हो उठा।
स्थानीय लोगों ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए इसकी सूचना मातलदेई चौकी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी साकेत पटेल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर पहले उसे शांत किया, उससे आत्मीयता से बात की और उसका भरोसा जीतने की कोशिश की।
थोड़ी ही देर में पुलिस की संवेदनशीलता और अपनत्व ने असर दिखाया और बच्चे ने अपने घर तथा परिजनों की जानकारी साझा कर दी। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए थाना चुनार से संपर्क कर परिजनों की जानकारी प्राप्त करते हुए परिवार तक सूचना पहुंचाई।
उधर, परिवार अपने बच्चे की गुमशुदगी से बेहद परेशान था और लगातार तलाश में जुटा हुआ था। जैसे ही पुलिस से सूचना मिली कि बच्चा सुरक्षित है, परिवार की चिंता पलभर में राहत और आंसुओं में बदल गई।
कुछ ही समय बाद जब परिजन मातलदेई चौकी पहुंचे और अपने मासूम बेटे को सुरक्षित देखा, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। मां-बाप ने अपने बच्चे को कसकर गले लगा लिया, जैसे वर्षों बाद जिंदगी वापस मिल गई हो। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं।
स्थानीय लोगों ने चौकी प्रभारी साकेत पटेल और उनकी टीम के इस मानवीय, संवेदनशील और त्वरित प्रयास की जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि यह घटना सिर्फ एक बच्चे के मिलने की नहीं, बल्कि उस भरोसे की वापसी है जो आम लोगों के दिल में पुलिस के प्रति और मजबूत हुआ है।
यह घटना एक बार फिर साबित कर गई कि वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक पिता, एक संरक्षक और एक उम्मीद भी बन सकती है — जो भटके हुए को रास्ता और टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ देती है।

पत्रकार विजय लक्ष्मी तिवारी

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