
मौसम में बदलाव और संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच रामनगर स्थित ब्रेथ ईज़ी हॉस्पिटल के श्वांस ,फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल पाठक ( पूर्व पल्मोनोलॉजिस्ट मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली )ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्वाइन फ्लू (H1N1 इन्फ्लूएंजा) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि – “समय पर पहचान और उचित देखभाल से स्वाइन फ्लू का पूरी तरह से इलाज संभव है, इसलिए पैनिक (घबराहट) पैदा करने के बजाय जागरूकता और सतर्कता बरतना जरूरी है।“
डॉ. स्वप्निल ने बताया कि – “स्वाइन फ्लू ‘इन्फ्लूएंजा-ए’ वायरस के H1N1 स्ट्रेन के कारण होने वाला एक तीव्र श्वसन संक्रमण (Respiratory Infection) है। यह मुख्य रूप से हवा में मौजूद सूक्ष्म बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है।”
डॉ. स्वप्निल पाठक के अनुसार, स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनकी तीव्रता अधिक होती है, जैसे – अचानक तेज बुखार आना और कंपकंपी लगना, लगातार सूखी खांसी और गले में खराश या दर्द, सांस लेने में कठिनाई या छाती में भारीपन, शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना, कुछ मामलों में उल्टी, दस्त या भूख न लगना I
डॉ. स्वप्निल ने बताया कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, अस्थमा, सीओपीडी, डायबिटीज, हृदय रोग या कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिएI
बचाव और रोकथाम के लिए डॉ स्वप्निल ने बताया – नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं, या अल्कोहल-युक्त हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।, भीड़भाड़ वाली जगहों पर या अस्पताल जाते समय मास्क अवश्य पहनें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिशू या रुमाल से ढकें। सर्दी-खांसी या बुखार से पीड़ित व्यक्ति से कम से कम 1 से 2 मीटर की दूरी बनाए रखें। भरपूर मात्रा में गुनगुना पानी पिएं और पौष्टिक आहार लें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत रहे। जोखिम वर्ग के लोग डॉक्टर की सलाह से वार्षिक फ्लू का टीका जरूर लगवाएं।
अंत में डॉ. स्वप्निल पाठक ने चेतावनी देते हुए कहा, “अक्सरलोग बुखार या खांसी होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाएं लेने लगते हैं। स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है, इसलिए इसमें एंटीबायोटिक्स काम नहीं करतीं। इसके लिए विशेष एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं, जिन्हें केवल चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही लेना चाहिए। यदि सांस लेने में तकलीफ हो या बुखार 3 दिनों से अधिक रहे, तो तुरंत नजदीकी विशेषज्ञ से संपर्क करें।”