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प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में वित्तीय अनियमितता का आध्यात्मिक पक्ष,आध्यात्मिक गलती के दोषी को मुख्य अभियुक्त माना जाए

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आईयूसीटीई (इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन) नरिया में आयोजित एक प्रेस वार्ता में डॉ सुनील कुमार,डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिटी मेडिसिन,आईएमएस,काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने पत्रकारों से बताया कि

उपर्युक्त विषय धन का फेर नहीं मन के फेर का है। यह गंभीर गुरुत्व संकट का परिणाम है। किसी भी व्यक्ति के तीन अवयव होते हैं: तन, मन, और आत्मा। इन तीनों में एक अवयव तन ही दृश्य होता है; पर मन और आत्मा अदृश्य होते हैं। सूक्ष्म दृष्टि वालों ने तन के भी तीन विभाग किए हैं: स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर।

परंतु वर्तमान संकट का संबंध मन से है। मन जैसा कहता है, तन वैसा ही करता है। अतः मन और उसकी प्रकृति का निर्माण जिस माध्यम से होता है, वह दोषपूर्ण हो, तो मन गलत दिशा में जाएगा। आत्मा की ऊर्जा व्यक्ति के स्वयं के कर्म के अनुसार परमात्मा से प्राप्त होती है, पर मन को दिशा संस्कार और गुरु से मिलता है।

संस्कार में यदि असुर ग्रहों का आवाहन और आहुति शामिल होगा तो व्यक्ति के प्रवृति में असुरत्व शामिल होगा। प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा में, कर्मकांड में राहु, केतु और शुक्राचार्य के शामिल होने से दोषपूर्ण ऊर्जा वहाँ से निगलेगी और भविष्य में पूजन होते रहने से उसमें गुणात्मक वृद्धि भी होगी। जिसका प्रभाव केवल वहाँ के कामगारों पर ही नहीं पड़ेगा; श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों पर भी पड़ेगा। अतः दोषपूर्ण पूजा पद्धति के आचार्य को मुख्य अभियुक्त माना जाए, जिनके निर्देशन का परिणाम वर्तमान की दुर्घटना है.

कलियुग में अष्ट चिरंजीवियों मे महर्षि वेद व्यास को गुरु माना गया है। ऋषियों में मार्कन्डेय ऋषि को गुरु बताया गया है। फिर द्रोणाचार्य को कलियुग में गुरु कैसे मान लिया गया? महाभारत के युद्ध में द्रोणाचार्य के मृत्यु के समय, उनके प्रश्नों का उत्तर देते समय भगवान श्रीकृष्ण ने द्रोणाचार्य को गुरु और पिता दोनों रूप में विफल बताया है। भगवान ने अपने पक्ष में उन्हें रखा भी नही। वे अधर्म के पक्ष में लड़े और उसी पक्ष से उनका अंत भी हुआ। ऊनके गुरु के रूप में कलियुग में चलाने के जिम्मेदार, जो जिम्मेदारी के पद पर हैं, दोषी हैं। खासकर वैष्णव संप्रदाय के। क्योंकि वर्तमान में कल्कि भगवान की आध्यात्मिक चेतना जागृत होने पर भी गंभीर गुरुत्व दोष, दिशा दोष के कारण सामान्य जन उनसे नहीं जुड़ पा रहा है। नतीजतनआध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। ज्योतिष विश्लेषण में भी असुर ग्रहों को शामिल कर लिया गया है। जिससे समाज में शांति के स्थान मे क्लेश, युद्ध, प्राकृतिक आपदा चल रहा है और अपेक्षित सुधार यथाशीघ्र न होने पर भविष्य में गंभीर संकट आ सकता है।

अतः, निम्नलिखित आध्यात्मिक पदाधिकारियों को दोषी माना जाय

सुनीलभाई मेहता, आरएसएस बौ‌द्धिक प्रमुख

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के प्रधान आचार्य

रामनरेशाचार्य, रामानंद संप्रदाय प्रमुख

निश्चलानन्द, ऋग्वैदिक गोवर्धन पीठाधीश्वर

भारती तीर्थ, श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर

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