
किसी भी देश ने भारत को अत्याधुनिक Gallium Nitride (GaN) सेमीकंडक्टर चिप तकनीक उपलब्ध नहीं कराई। इसकी वजह यह है कि GaN चिप्स को रणनीतिक और संवेदनशील रक्षा तकनीक माना जाता है, जिसका उपयोग रडार सिस्टम, मिसाइल ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर डिफेंस और स्पेस एप्लिकेशन में किया जाता है।
ये चिप्स पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स की तुलना में ज़्यादा पावर हैंडल कर सकती हैं, कम गर्म होती हैं और कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन देती हैं।
ऐसे में DRDO की वैज्ञानिक मीना मिश्रा के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने पूरी तरह स्वदेशी GaN सेमीकंडक्टर चिप विकसित कर ली। यह तकनीक वर्षों की रिसर्च, बार-बार टेस्टिंग और हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग का नतीजा है।
इस उपलब्धि के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास हाई-पावर GaN सेमीकंडक्टर तकनीक खुद की है। इससे न सिर्फ विदेशी देशों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भविष्य में भारत अपने रक्षा सिस्टम और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को और ज्यादा सक्षम बना सकेगा।
यह सफलता आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है, जो देश की तकनीकी और रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाई देती है।